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भास्कर पड़ताल: साल बीता, इन समस्याओं को हल नहीं कर पाया नगर निगम

हरेकृष्ण दुबोलिया | Last Modified - Dec 18, 2017, 06:39 AM IST

अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच तमाम बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा हुई।
भास्कर पड़ताल: साल बीता, इन समस्याओं को हल नहीं कर पाया नगर निगम

भोपाल.राजधानी के मास्टर प्लान से लेकर स्लाटर हाउस की शिफ्टिंग, शाहपुरा और शिरीन नाले में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बड़े तालाब का अतिक्रमण, तालाब कि रिटेनिंगवॉल विवाद का सालभर बाद भी हल नहीं निकला जा सका है। इन मुद्दों के अलावा भी सूची लंबी है, जिनमें जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाने का परिणाम राजधानी और उसकी जनता को भुगतना पड़ रहा है। साल 2017 के अंत में चार ऐसे बुनियादी मुद्दों की हमने पड़ताल की, जिनका हल साल की शुरुआत से ही तलाशा जा रहा है। अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच तमाम बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा हुई।

- एनजीटी ने आदेश दिए। खुद मुख्यमंत्री ने भी रुचि लेकर चर्चा की, लेकिन समाधान कुछ भी नहीं निकला। एनजीटी के आदेश और सीएम के निर्देश के बावजूद रिटेनिंगवॉल जहां की तहां खड़ी है। तालाब के आसपास से अतिक्रमण घटने के बजाय और बढ़े हैं। स्लाटर हाउस की शिफ्टिंग के लिए अभी तक जमीन का विवाद बरकरार है।

- शिरीन नदी और शाहपुरा झील में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए फरवरी में टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। 11 माह बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए आधा साल चुनावी तैयारी और प्रक्रिया में निकल जाएगा। इसलिए आशंका यह भी है कि 2018 में भी इन समस्याओं का हल शायद ही निकल पाए।

दावों और वादों की जमीनी हकीकत

स्लाटर हाउस

- एनजीटी ने स्लाटर हाउस शिफ्टिंग के लिए मार्च 2018 की मियाद तय की है। 31 मार्च के बाद जिंसी स्थित स्लाटर हाउस को हर हाल में बंद करना होगा, लेकिन इसकी शिफ्टिंग को लेकर पिछले दो साल से सियासत जारी है। लोगों के विरोध के बावजूद शासन ने आदमपुर छावनी में 5 एकड़ जमीन आवंटित कर दी। कंशेसनर कंपनी ने जीरो डिस्चार्ज के लिए 35 एकड़ जमीन की नई मांग रख दी है, जो पूरी हो पाना संभव ही नहीं है।

असर

- मैदामिल रोड के दोनों ओर आसपास की एक दर्जन कॉलोनियों के रहवासी यहां दुर्गंध और पक्षियों द्वारा सड़े हुए मांस के टुकड़े गिराने से परेशान हैं।

रिटेनिंगवॉल

-2680 मीटर लंबी रिटेनिंगवॉल तालाब में अतिक्रमण रोकने के इरादे से बनाई गई थी, लेकिन 2016 में जब पानी एफटीएल तक पहुंचा, तब खुलासा हुआ कि दीवार का ज्यादातर हिस्सा तालाब में बनाया गया है। एनजीटी ने दीवार पर सवाल उठाए। नगर निगम ने ट्रिब्यूनल में गलत जानकारी दी। जब विरोध बढ़ा तो मुख्यमंत्री ने खुद रिटेनिंगवॉल का दौरा कर तत्कालीन कलेक्टर और निगमायुक्त को निर्देश दिए कि दीवार तोड़ी जाए।

क्या हुआ

- सीएम के निर्देश को डेढ़ साल बीतेने जा रहा है, लेकिन अब तक दीवार पर नगर निगम कोई फैसला नहीं ले पाया है। दीवार जहां की तहां खड़ी है।

अवैध कब्जे

-बड़े तालाब किनारे खानूगांव से लेकर हलालपुरा, बोरवन, बैरागढ़, भैंसाखेड़ी आदि इलाकों में भारी अतिक्रमण हैं। जो न केवल तालाब को गंदा करते हैं, बल्कि जलीय वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। डॉ. अलंकृता मेहरा की याचिका पर एनजीटी ने बड़े तालाब के एफटीएल से 300 मीटर दूरी तक सभी अतिक्रमण हटाते हुए नो-कंस्ट्रक्शन जोन बनाने का आदेश दिया था।

क्या हुआ

- 934 मुनारों में से 400 या तो पानी में डूबी मिलीं या गलत स्थानों पर, लेकिन अब तक न तो मुनारों की पोजीशन को ठीक की गई, न ही अतिक्रमण हटाए गए।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

- नगर निगम के मुताबिक तालाब में रोजाना 20 एमएलडी सीवेज जाता है। 10 एमएलडी सीवेज अकेले शिरीन नाले के जरिए तालाब में गिरता है। इस स्थान से नगर निगम के पंपहाउस की दूरी 500 मीटर है। एनजीटी ने निगम को फरवरी 2017 तक शिरीन नाले में एसटीपी लगाने का आदेश दिया था, लेकिन एक साल से मामला एसटीपी के लिए टेंडर प्रक्रिया में ही उलझा हुआ है।

असर

- गंदे नालों के जरिय सीवेजयुक्त पानी तालाब में सीधे मिलने से पानी में कोलीफॉर्म और हैवीमैटल की मात्रा लगातार बढ़ रही है।

जिम्मेदारों के ऐसे तर्क... मैंने दो दिन पहले ही चार्ज लिया, उन साहब से पूछिए

- शिरीन नाला, हलालपुरा नाला और शाहपुरा झील में एसटीपी के लिए फिर से टेंडर लगाया है। मैंने दो दिन पहले सीवेज प्रकोष्ठ का चार्ज संतोष गुप्ता को सौंपा दिया है। अब मैं इस जिम्मेदारी से मुक्त हो गया हूं।
एआर पवार, उपायुक्त पूर्व प्रभारी सीवेज प्रकोष्ठ

- रिटेनिंगवॉल जहां थी, वहीं मौजूद है। एसटीपी तो काफी पहले लग जाने चाहिए थे, इसमें देरी क्यों हुई यह तो एआर पवार साहब बता सकते हैं। मैंने तो दो दिन पहले ही सीवेज प्रकोष्ठ का चार्ज संभाला है।
संतोष गुप्ता, प्रभारी झील प्रकोष्ठ

स्लॉटर हाउस की शिफ्टिंग के लिए प्रयास लगातार जारी हैं। देरी पर मैं कोई कमेंट नहीं करूंगा। कंपनी 35 एकड़ जमीन मांगी है। उनके नए प्रस्ताव का इंतजार है।
एमपी सिंह, अपर आयुक्त
जनस्वास्थ्य एवं स्वच्छता

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Web Title: bhaaskar pdetaal: saal bitaa, in smsyaaon ko hl nahi kar paayaa ngar nigam
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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