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गणेश जी की 13 हजार भाव-भंगिमाओं वाली मूर्तियों का सुबोध ने किया संग्रह

गणेश मंदिर पिपलानी से लगे अयोध्या बायपास पर रहने वाले 38 वर्षीय सुबोध कुमार केंन्दुरकर को बचपन से गणेश भगवान की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 03, 2018, 02:00 AM IST

गणेश मंदिर पिपलानी से लगे अयोध्या बायपास पर रहने वाले 38 वर्षीय सुबोध कुमार केंन्दुरकर को बचपन से गणेश भगवान की मूर्तियों को संग्रह करने का शौक रहा है। सबसे पहले साढ़े चार साल की आयु में उन्हें पिताजी ने छोटी सी गणेशजी की प्रतिमा लाकर दी थी। उसके बाद वह गणेशजी के भक्त हो गए। पढ़ते समय में भी किताबों में गणेशजी की आकृति देखते रहते थे।

सुबोध के अनुसार सबसे पहले उन्होंने टारगेट नहीं रखा था। जहां भी उन्हें नए रूप में गणेशजी की मूर्ति दिखाई देती वे उसे घर लेकर आ जाते थे। जब संख्या एक सौ से ज्यादा हुई, तब यह विचार आया कि कम से कम 10 हजार गणेशजी के विभिन्न रूप जोड़ूगा। संख्या जब 10 हजार पहुंची तो टारगेट को 20 हजार तय कर दिया। सुबोध गणेशजी की अब तक 13 हजार प्रतिमाएं संग्रह कर चुके हैं। सभी प्रतिमाओं का रूप अलग-अलग है। सबसे छोटे रुद्राक्ष में विराजे गणेश जी हैं। इसके अलावा छोटे से बेर के आकार के अलावा शिवलिंग और मोती के रूप में भी गणेश जी हैं। इन प्रतिमाओं के अलावा जूट, कपड़े व धागों से बने हुए गणेशजी के साथ ही छोटे से चूहे के साथ बैठे गणेशजी भी विशेषता लिए हुए हैं।

सुबोध कुमार केंदुरकर पूरे देश में घूमकर ढूंढते हैं गणेशजी की प्रतिमाओं को। उन्होंने 21 हजार अलग-अलग रूपों वाली मूर्तियों के संग्रह का लक्ष्य रखा है

बचपन से है मूर्तियों के संग्रह का शौक

सबसे ज्यादा स्फटिक व प्रिज्म रूप में

सुबोध कुमार के अनुसार वह जो भी प्रतिमाएं संग्रह करतेे हैं, उन्हें वह किसी को भी नहीं देते। वह देश के कई हिस्सों में घूमकर इन प्रतिमाओं को इकट्‌ठा करते हैं। खास बात यह है कि 13 हजार में से करीब 2 हजार प्रतिमाएं स्फटिक व प्रिज्म के रूप में हैं। इसके अलावा मेटल से बनी हुई 500 प्रतिमाएं उनके पास हैं।

यह हैं आकर्षण का केंद्र

चूहे व मिकी माउस के समान, चूहे के साथ शतरंज खेलते हुए, काले पत्थर के गणेश जी, रुद्राक्ष वाले गणेशजी, बैंगलुरु डिजायन, जयपुरी तर्ज, मोम के गणेशजी, कागज पर छोटे एडी व धागे से बनाए गणेशजी, रुद्राक्ष से बने सिंदूरी प्रतिमा, अदरक के गणेशजी, बैगन में बने हुए गणेशजी, पगड़ी व धोती पहनकर पुराण लिखते हुए, हारमोनियम बजाते आदि।

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