• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Bhopal
  • News
  • अंधेरे तलघर के बीच दिखी रूसी लोगों कीे जीवनशैली की निराशा
--Advertisement--

अंधेरे तलघर के बीच दिखी रूसी लोगों कीे जीवनशैली की निराशा

तलघर में किस तरह अलग-अलग तरह के लोग जिंदगी की परेशानियों से जूझते हुए जीवन की सत्यता को महसूस करते हैं, उसका एक...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:05 AM IST
अंधेरे तलघर के बीच दिखी रूसी लोगों कीे जीवनशैली की निराशा
तलघर में किस तरह अलग-अलग तरह के लोग जिंदगी की परेशानियों से जूझते हुए जीवन की सत्यता को महसूस करते हैं, उसका एक जीवंत उदाहरण बुधवार को भारत भवन के अंतरंग सभागार में मंचित नाटक तलघर में देखने को मिला। मैक्सिम गोर्की ने इस नाटक को 1901 की ठंड और 1902 की वसंत के समय में लिखा। रूस में लोगों की जिंदगी को दिखाते इस नाटक ने उस समय के लोगों की काफी आलोचना भी सही। यह दुनिया का पहला यथार्थवादी नाटक माना जाता है।

नाटक पर बन चुकी हैं अब तक सात फिल्में

मप्र नाट्य विद्यालय के 2017-18 बैच के स्टूडेंट्स द्वारा प्रस्तुत नाटक को वरिष्ठ रंगनिर्देशक आलोक चटर्जी ने निर्देशित किया है। मैक्सिक गोर्की के इस नाटक पर अभी तक दुनियाभर में 7 फिल्में भी बन चुकी हैं। इस पर सबसे पहली फिल्म 1921 में जापान के डायरेक्टर ने बनाई। ‘सोल्स ऑन द रोड’ नाम से बनी यह फिल्म एक साइलेंट फिल्म थी। इसके बाद 1936 में इस नाटक पर एक फ्रेंच फिलम बनी और 1946 में भारतीय सिने निदेशक चेतन आनंद ने इस नाटक पर आधारित फिल्म ‘नीचा नगर’ बनाई। जिसमें 1946 में हुए पहले कांस फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म अवॉर्ड भी मिला था। नाटक के निर्देशक आलोक चटर्जी ने कहा, यह एक बड़ी इमारत के बेसमेंट की कहानी है, जिसमें अलग-अलग तरह के लोग रहते हैं। कड़वे सच और सुकून देने वाले झूठ के बीच की यह कहानी उस वक्त के रूस का सही चित्रण करती है। प्रस्तुति में मंच, वेशभूषा, वाद्ययंत्र, प्रॉपर्टी और संगीत भी रूसी रखा गया था, जिससे 20वीं शताब्दी के शुरुआती समय के रहन-सहन को दिखाया जा सके।

साल 1902 में लिखे गए इस नाटक को उस वक्त रूसी लोगों की आलोचना से भी दो-चार होना पड़ा था।

X
अंधेरे तलघर के बीच दिखी रूसी लोगों कीे जीवनशैली की निराशा
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..