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Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:05 AM IST
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गौरतलब है कि शहर में वाहनों की नंबर प्लेट बनाने का जिम्मा पहले लिंक उत्सव प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सौंपा गया था। ये नंबर प्लेट हाई सिक्योरिटी वाली होती थीं, जिसमें वाहन से संबंधित पूरा ब्यौरा दर्ज रहता था। लेकिन विवाद के चलते वर्ष 2014 में यह काम उससे छीन लिया गया। उसका टेंडर निरस्त होने के बाद से अब तक परिवहन विभाग नई कंपनी का चयन नहीं कर पाया है। पिछले तीन वर्षों से प्रदेश में अब तक हजारों नए वाहन बिके हैं। ये वाहन साधारण नंबर प्लेट लगाए सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से कुछ वाहनों पर नंबर कलाकारी कर लिखे हुए हैं। इन्हें एक नजर में पढ़ पाना मुश्किल होता है। ऐसे में कभी कोई दुर्घटना होने पर वाहन और वाहन चालक की पहचान भी नहीं हो पाती है।गौरतलब है कि शहर में वाहनों की नंबर प्लेट बनाने का जिम्मा पहले लिंक उत्सव प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सौंपा गया था। ये नंबर प्लेट हाई सिक्योरिटी वाली होती थीं, जिसमें वाहन से संबंधित पूरा ब्यौरा दर्ज रहता था। लेकिन किसी न किसी विवाद के चलते वर्ष 2014 में यह काम उससे छीन लिया गया। उसका टेंडर निरस्त होने के बाद से अब तक परिवहन विभाग नई कंपनी का चयन नहीं कर पाया है।

पिछले तीन वर्षों से प्रदेश में अब तक हजारों नए वाहन बिके हैं। ये वाहन साधारण नंबर प्लेट लगाए सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से कुछ वाहनों पर नंबर कलाकारी कर लिखे हुए हैं। इन्हें एक नजर में पढ़ पाना मुश्किल होता है। ऐसे में कभी कोई दुर्घटना होने पर वाहन और वाहन चालक की पहचान भी नहीं हो पाती है।

राजधानी के एमपीनगर, जवाहर चौक और जहांगीरबाद इलाके में वाहनों की नंबर प्लेट बनाने की दुकानें हैं। यहां मनपसंद और आकर्षक नंबर प्लेट 100 से 500 रुपए देकर बनवा सकते हैं। खुलेआम चल रहे इस धंधे पर न तो परिवहन विभाग कार्रवाई करता है और न ही पुलिस। इसकी एक वजह यह भी है कि प्रदेश में जिस कंपनी को परिवहन विभाग ने नंबर प्लेट बनाने का काम सौंपा था, वह दो साल पहले वर्ष 2015 में अपना सामान समेटकर जा चुकी है। इसके बाद नई कंपनी को अब तक यह ठेका नहीं दिया गया है।

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