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1866 के बाद बुधवार को दिखा कॉपर मून

चंद्रग्रहण कोई अशुभ घटना नहीं, बल्कि यह तो यह एक खगोलीय घटना होती है। बुधवार को हुआ चंद्रग्रहण इसलिए खास है,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:10 AM IST

चंद्रग्रहण कोई अशुभ घटना नहीं, बल्कि यह तो यह एक खगोलीय घटना होती है। बुधवार को हुआ चंद्रग्रहण इसलिए खास है, क्योंकि सुपर मून, ब्लड मून, ब्लू मून और कॉपर मून से जानी जाने वाली यह घटना इससे पहले 1866 में हुई थी। चंद्रग्रहण के समय करीब 24 मिनट तक चंद्रमा के धरती की सतह से करीब 5 डिग्री कोण पर होने के कारण यह लाल, नीला और सफेद नजर आया। इस घटना को बच्चों ने रीजनल साइंस सेंटर में दूरबीन से देखा।

टेलीस्कोप से चंद्रग्रहण देखती बच्ची।

सुपर मून के बारे में जानकारी देते साइंस सेंटर के अधिकारी।

साइंस सेंटर के प्रोजेक्ट हैड प्रबल राय ने इस मौके पर बच्चों को बताया कि बुधवार को इस माह की दूसरी पूर्णिमा थी। इस घटना को खगोलीय भाषा में सुपरमून और ब्लू मून के साथ खग्रास चंद्र ग्रहण भी कहा गया। साइंस सेंटर में बच्चों से चंद्रमा को कॉन्केव टेलीस्कोप और सेलेस्टॉन टेलीस्कोप के माध्यम से देखा। यहां सभी एज ग्रुप के लोग मौजूद रहे। इस खगोलीय घटना कोे देखने के लिए ज्ञान-विज्ञान परिसर में भी टेलीस्कोप लगाया।

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