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सदन में MLA की सक्रियता जान सकेगी जनता

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Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:10 AM IST
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मप्र विधानसभा द्वारा रिकार्ड रूम में रखे करीब 400 साल पुराने रिकार्ड को डिजिटलाइज्ड करने का काम किया जा रहा है। इसका मूल मकसद तो पुराने रिकार्ड को संरक्षित करना और आम जनता को जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की जानकारी देना है। इससे जनता को पता चलेगा कि उसके द्वारा चुने गए नेता उनके लिए क्या काम किया और क्या कर रहे हैं? इसी काे ध्यान में रखकर विधानसभा द्वारा करीब चार महीने पहले रिकार्ड को डिजिटल करवाने का काम शुरू किया गया। इसमें 1600 ईस्वी में ब्रिटेन की हाउस ऑफ कामंस में सदस्यों के बीच हुई डिबेट का हिस्सा और मप्र के गठन से लेकर अब तक के मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधानसभा सदस्यों के बीच हुई बहस के हिस्से प्रमुख हैं। यह काम एक निजी सॉफ्टवेयर कंपनी कर रही है। यह काम अगले छह-सात महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद सभी विधायकों को डाटा इस्तेमाल करने की जानकारी दी जाएगी। ट्रेनिंग में यह बताया जाएगा कि वे किस तरह जान सकते हैं कि उन्होंने कब किस विषय पर कौन सा भाषण दिया था। इसके लिए रिफ्रेंस कॉलम तैयार किया जा रहा है। एक की-वर्ड लिखकर इसे आसानी से देखा जा सकेगा। वहीं डिजिटल किए गए रिकार्ड में से ऐसे प्रमुख मुद्दे जो आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं, उन्हें ऑनलाइन किया जाएगा। इनमें सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर जो बहस हुई, उन्हें अलग से डिजिटलाइज्ड किया जा रहा है। इसका फायदा यह होगा कि इस रिकार्ड का विधानसभा में होने वाली सकारात्मक बहस के रूप में विधायक भी इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही उनके क्षेत्र की जनता भी देख सकेगी। हालांकि वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह ने इसको लेकर सवालिया निशान लगाया है। उनका कहना है कि पहले मप्र की ग्रामीण जनता को टेक्नोलॉजी से लैस किया जाना जरूरी है। वहीं विधायक रामनिवास रावत ने उठाया है कि क्या इतना सारा रिकार्ड आम लोग अपने मोबाइल पर देख सकेंंगे। जिम्मेदारों ने बताया कि क्या ऑनलाइन दिखाना है और क्या नहीं, यह निर्णय रिकार्ड के डिजिटलाइज्ड होने के बाद लिया जाएगा।


काम चल रहा

 रिकार्ड को डिजिटल करने का काम चल रहा है। जैसे ही यह पूरा होगा हम इसे आम आदमी के लिए भी वेबसाइट के माध्यम से अपलोड कर देंगे। ताकि लोग जान सकंे कि उनके प्रतिनिधियों ने किन मुद्दों पर चर्चा की है। इसमें संभवत: एक साल लगेगा। डॉ. सीताशरण शर्मा, अध्यक्ष, मप्र विधानसभा

पहले जागरूकता जरूरी

 यह अच्छी बात है कि रिकार्ड को डिजिटलाइज्ड करके सुरक्षित किया जा रहा है। लेकिन आम जनता को यह जानकारी देने वाली बात समझ में नहीं आती। सबकुछ डिजिटल करने से पहले लोगों को तकनीकी रूप से लैस करना होगा। जागरूकता जरूरी है। आज भी ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट का कोई उपयोग नहीं होता है। डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक कांग्रेस

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