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गठन से अब तक का रिकार्ड मिलेगा

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Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:10 AM IST
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विधानसभा में सॉफ्टवेयर कंपनी परसिसटेंट द्वारा यह काम किया जा रहा है। इसे विधानसभा ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशनल आफ रिकार्डिंग एंड प्रोसिडिंग नाम दिया है। इसके तहत वर्ष 1956 से लेकर अब तक का डाटा स्कैन किया जा रहा है। इसके लिए एक स्कैन मशीन लगाई गई है। इसमें दो हाई रेज्युलेशन कैमरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक फोटो की फाइल साइज करीब 8 से 10 एमबी तक बनती है। जिसकी मदद से कभी भी कितनी भी बड़ी फाइल प्रिंट के रूप में निकाली जा सकती है।

स्कैन होने के बाद डाटा को कैटेगरी वाइज अलग-अलग फाइलों में सेव किया जाता है। करीब 50 लोगों की टीम इसमें सुबह से शाम तक काम करती है। जो डाटा इनके द्वारा स्कैन किया जाता है, वह प्रतिदिन विधानसभा के अधिकारी जारी करते हैं और शाम को उसका अपडेट लेते हैं।

मप्र विधानसभा ने उत्तरप्रदेश और हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में रिकार्ड को डिजिटलाइज्ड किए जाने के बाद यह काम शुरू किया है। मप्र के गठन के समय प्रदेश की विधानसभा को अधिकांश रिकार्ड सेंट्रल प्राविंस एंड बरार की राजधानी नागपुर से मिला था, जिसमें ब्रिटेन की हाउस आॅफ कामंस में चार सौ साल पहले सदस्यों के बीच हुई डिबेट के अंश और पुराने एआईआर जनरल भी हैं। इसके अलावा विंध्य, मध्यभारत और भोपाल स्टेट का रिकार्ड भी शामिल है। यह सभी रिकार्ड वर्ष 1956 के पहले का है। इसके बाद 1956 से 2017 तक मप्र विधानसभा में होने वाली प्रमुख डिबेट का जो रिकार्ड है, उसे डिजिटलाइज्ड किया जाएगा।

मोबाइल पर देख पाएंगे?

 अब लोग लैपटॉप का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो क्या इस रिकार्ड को मोबाइल पर आसानी से देख पाएंगे। जरूरी यह है कि मोबाइल लायक इसे बनाया जाए, तभी आम जनता तक इसे पहुंचाया जा सकेगा। रामनिवास रावत, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस विधायक

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