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होली के प्रत्येक रंग का वैज्ञानिक आधार है: ब्रह्मचारी गिरीश

भोपाल | होली के जितने रंग हैं…वह केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक का वैज्ञानिक आधार है। हर राशि का एक...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:15 AM IST
भोपाल | होली के जितने रंग हैं…वह केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक का वैज्ञानिक आधार है। हर राशि का एक रंग होता है, प्रत्येक नक्षत्र का एक-एक रंग होता है, ठीक इसी तरह वात, पित्त एवं कफ का भी अपना रंग होता है। प्रत्येक स्वर का रंग होता है, और प्रत्येक रंग का अपना-अपना जीवन में महत्व है। रंगों का यही सम्मिश्रण सफल, पूर्ण आनन्दमय जीवन प्रदायक है जिस पर महर्षि संस्थान विश्व शांति के लिये काफी अनुसंधान कर रहा है। यह विचार महर्षि विश्व शांति आंदोलन एवं इलाहाबाद बैंक द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में महर्षि विद्या मंदिर समूह के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश जी ने व्यक्त किए। उनका कहना था कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन 15 मिनट प्रात: भावातीत ध्यान कर ले, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित होगा एवं प्रत्येक व्यक्ति के जीवन से तनाव, अशांति, चिंताओं की समाप्ति होगी। हमें वर्तमान शिक्षा पद्धति में वैदिक शिक्षा योग और भावातीत ध्यान को जोड़ना चाहिए। वहीं चिंतक एवं विचारक प्रभुदयाल मिश्र ने होली के रंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आध्यात्म में इसका अपना विशेष महत्व है। दर्शन, धर्म, अध्यात्म में यदि हम व्यवहारिक पक्ष का समन्वय करें तो जीवन में सार्थकता आएगी। इसके बाद इलाहाबाद बैंक के उप महाप्रबंधक सुजय मलिक ने कहा कि हम बैंकिंग का कार्य करते हैं, लेकिन इस व्यक्तित्व विकास के कार्यक्रम में आकर हमारी टीम को बड़ी प्रसन्नता हुई। इस कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन मुख्य प्रबंधक इलाहाबाद बैंक सुश्री कल्पना पुरोहित ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महर्षि संस्थान के सदस्य एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए।