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एंबुलेंस 108: मरीजों की परवाह न जिगित्सा को, न उनके स्टाफ को, सरकार नोटिस थमाकर फारिग

हादसे के घायलों, गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इमरजेंसी में त्वरित इलाज देने के लिए शुरू की गई एंबुलेंस 108...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:15 AM IST
हादसे के घायलों, गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इमरजेंसी में त्वरित इलाज देने के लिए शुरू की गई एंबुलेंस 108 सेवा गुरुवार को भी प्रदेश में बंद रही। एंबुलेंस 108 के इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन और पायलट (ड्राइवर) वेतन-भत्तों का पेमेंट समय पर करने, वेतन बढ़ाने और काम के घंटे घटाने की मांग को लेकर बुधवार से हड़ताल पर हैं। इसका खामियाजा मरीजों को इमरजेंसी ट्रीटमेंट से वंचित होकर भरना पड़ रहा है। वहीं सरकार ने एंबुलेंस ऑपरेटर कंपनी जिगित्सा हेल्थ केयर को 24 घंटे में ऑफ रोड हुई एंबुलेंस को ऑन रोड करने का नोटिस दिया है।

एंबुलेंस के ईएमटी और पायलट ने गुरुवार सुबह 9 बजे राजधानी में संचालित सभी 15 एंबुलेंस जेपी अस्पताल परिसर में खड़ी कर दीं। एंबुलेंस स्टाफ ने कंपनी से अपनी मांगों को मनवाने के लिए मरीजों के इमरजेंसी ट्रीटमेंट को दरकिनार कर दिया। इसके चलते अकेले भोपाल में ही 100 से ज्यादा मरीजों को अस्पताल जाने के लिए प्राइवेट एंबुलेंस और टैक्सी का सहारा लेना पड़ा।





अब नहीं चाहिए दस्तावेजी कार्रवाई

भोपाल जिले के कर्मचारी जेपी अस्पताल में गुरूवार सुबह इकट्‌ठे हुए। सभी ने सरकार विरोधी नारे लगाकर सीएमएचओ को ज्ञापन सौंपा। नाराज एंबुलेंस कर्मचारियों ने बताया कि कंपनी हर बार झूठा आश्वासन देती है। इस कारण इस बार एंबुलेंस का संचालन मांगों का निराकरण पूरा होने पर ही दोबारा शुरू होगा। 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के मीडिया प्रभारी असलम खान ने बताया कि कंपनी ने पहले की गई हड़ताल के बाद लिखित में आश्वासन दिया था जिसे अभी तक पूरा नहीं किया। खान का कहना है कि अब दस्तावेजी कार्रवाई नही चलेगी जब तक काटी गई राशि नहीं मिलती तब तक हड़ताल जारी रहेगी।



वर्जन : -

हालत... राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में 100 से ज्यादा मरीज निजी साधनों से पहुंचे

इधर मरीज परेशान, उधर बनाई मानव शृंखला

कॉल सेंटर कर्मचारी दे रहे गलत जानकारी -जिगित्सा हेल्थ केयर के अफसर, पायलट और ईएमटी की हड़ताल को छुपा रहे हैं। इसके लिए वह इमरजेंसी एंबुलेंस 108 की डिमांड करने वाले व्यक्ति को बताई गई लोकेशन पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने का हवाला दे रहे हैं। इस दौरान कॉलर द्वारा दूसरे स्थान की एंबुलेंस मांगे जाने पर अफसर कॉल कॉट रहे हैं।











इस कारण एक ही व्यक्ति को एंबुलेंस की शिकायत दर्ज कराने बार - बार कॉल करना पड़ रहा है।

जिद... यदि कंपनी कटी हुई सैलरी खाते में डाल देगी तो खत्म कर देंगे हड़ताल

दो उदाहरण

18 मिनट में पहुंचने वाली एंबुलेंस 40 मिनट बाद भी नहीं पहुंची

शाम 5.08 बजे 108 को फोन किया गया कि मयूर पार्क के पास एक्सीडेंट हो गया है। कॉल सेंटर से बार-बार यही उत्तर मिला, कॉल मत काटना, संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद फोन काट दिया गया। 40 मिनट के इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची।

मरीज को कुछ होता है तो जिम्मेदार 108 एंबुलेंस

जेपी अस्पताल में शाम पांच बजे तक 10 गर्भवती महिलाएं ऑटो से पहुंचीं। निजी एंबुलेंस से उषा नाम की महिला गंभीर हालत में पहुंची। परिजनों का आरोप है कि यदि उनके मरीज को कुछ हो जाता है तो इसके लिए 108 जिम्मेदार होगी। गंभीर स्थिति होने की वजह से महिला को हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया गया।

24 घंटे का नोटिस