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स्वच्छता की पिचकारी, किस्सों की फुहारें

बीते साल साफ-सफाई में इंदौर अव्वल आया। भोपाल दूसरे नंबर पर। होली के पहले दोनों शहरों में एक बार फिर इम्तेहान हुआ।...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:15 AM IST
बीते साल साफ-सफाई में इंदौर अव्वल आया। भोपाल दूसरे नंबर पर। होली के पहले दोनों शहरों में एक बार फिर इम्तेहान हुआ। स्वच्छता का सिरमौर कौन बनेगा? इंदौर का ताज बरकरार रहेगा या भोपाल बाजी मारेगा? दोनों शहरों ने दम लगाया। सालभर जितना किया, उससे ज्यादा दिल्ली की टीम को चार दिन में दिखाया। महापौर, कमिश्नर और पूरा अमला दिन-रात जुटा रहा। जब यह जद्दोजहद चली, कई दिलचस्प वाकये सामने आए। इनकी कहीं चर्चा नहीं हुई। होली के मौके पर पेश है देश के दो सबसे साफ-सुथरे शहरों से रंगारंग फुहारें...

रंगेहाथों

भोपाल में नगर निगम ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिए थे कि प्राचार्य के नेतृत्व में एक कमेटी बनाएं। चमकदार स्कूल को सार्टिफिकेट मिलेगा। टीम ने सूची के मुताबिक स्कूलों में जाने का प्लान बनाया तो अफसरों के होश उड़ गए। टीम स्कूलों में पहुंची तो प्राचार्यों ने कह दिया कि इस बारे में निगम से हमारा कोई संवाद ही नहीं हुआ। कुछ प्राचार्यों को तो यह तक नहीं मालूम कि सर्टिफिकेट उन्हें क्यों दिया जा रहा है।

बड़ा सवाल

सख्ती

महापौर मालिनी गौड़ व्हाइट चर्च चौराहे से एमवायएच रोड की आेर कार से जा रही थीं। आगे एक बस थी। उसी में से किसी ने कचरा प्लास्टिक में डालते हुए फेंका तो वह मेयर की गाड़ी के बोनट पर गिरा। आगे की सीट पर बैठीं मेयर ने ड्राइवर को गाड़ी आगे लेने के लिए कहा और फिर बस रुकवाई और कचरा फेंकने वाले पर 5 हजार का स्पॉट फाइन किया।

कागजी कारनामों के हुनरमंद

कौन सा वाला स्वच्छता अभियान

गुस्ताखी नाकाबिले बर्दाश्त

जेपी अस्पताल में ओपीडी खत्म होने के बाद दोपहर के वक्त 8 डॉक्टर्स मेडिकल सुविधाओं पर गपशप कर रहे थे। तभी अस्पताल के सामने से नगर निगम की कचरा गाड़ी स्वच्छता का मधुर गीत बजाती हुई निकली। इस पर एक चिरक्रोधी डॉक्टर ने कटाक्ष किया कि ये बताओ कि अपने यहां स्वच्छता अभियान कब शुरू होगा? दूसरे डॉक्टर ने चुटकी ली-कौन सा वाला स्वच्छता अभियान?

इतनी मेहनत तो परीक्षा के लिए नहीं की

स्वच्छता सर्वे नगर निगम के अफसरों के लिए परीक्षा के सिरदर्द जैसा हो गया है। पहले केंद्र सरकार द्वारा तय मापदंड के अनुसार फाइलें तैयार करना और फिर उन्हें धरातल पर भी साबित करके दिखाना। जैसे सिलेबस के अनुसार नोट्स तैयार करना और लैब में प्रेक्टिकल में भी परफेक्ट साबित होना। अभियान में जुटे नगर निगम के अफसर हर कहीं कहते नजर आए कि इतनी मेहनत तो हमने अफसर बनने के लिए दी गई परीक्षाओं में भी नहीं की, जितनी शहर को स्वच्छता में अव्वल लाने के लिए करना पड़ रही है।

पेड़ से गिरे पत्ते भी असहनीय

इंदौर की पूर्वी रिंग रोड की काॅलोनियों में साफ-सफाई व्यवस्था का जायजा लेने निकला इंदौर नगर निगम का काफिला जैसे ही बांबे हॉस्पिटल के पास पहुंचा तो वहां मौजूद एक सज्जन ने शिकायती लहजे में अमले से कहा कि साहब हमारे यहां से कभी कचरा नहीं उठता। इतना सुनते ही शहर का कोना-कोना चमकाने में जुटे मेयर-कमिश्नर दोनों चौंक गए। दोनों ने उन सज्जन को साथ लिया और महालक्ष्मी नगर पहुंच गए, लेकिन वहां कूड़ा-कचरा तो नहीं मिला बस घर के सामने पेड़ से गिरे पत्ते बिखरे पड़े थे। अमले में मौजूद एक अफसर ने कहा- यह अच्छे लक्षण हैं। अब लोग सफाई पर इस हद तक सजग हैं कि सूखी बिखरी पत्तियां भी उन्हें खटकने लगी हैं।

सिरदर्द

अच्छे लक्षण

कबाड़ खाना

सांसें फूलीं

एक दिन पता चला कि कार्वी की टीम आज झुग्गीबस्तियों में बने व्यक्तिगत टॉयलेट देखने आएगी। 36 हजार टॉयलेट में से पता नहीं कार्वी का इंस्पेक्टर कहां पहुंच जाए। अफसरों ने अपने-अपने क्षेत्रों में टॉयलेट की जांच शुरू कर दी। इस बीच सेट पर आवाज गूंजी- देखना ‘किसी ने भूसा नहीं भर रखा हो।’ दरअसल, ओडीएफ के सर्वे से पहले कुछ टॉयलेट में भूसा भरा मिला था।

ऑन स्पॉट

अफसर कुछ भी कर सकते हैं

टॉयलेट में भूसा न भर रखा हो

रुकिए, अंदर सफाई जारी है

‘कबाड़ से जुगाड़’ को बढ़ावा देने के लिए महापौर खुद ठेला लेकर निकले थे। घरों से टीवी और रेडियो निकाल-निकाल कर लोगों ने सस्ते में बेच दिए। बाद में लोगों ने पूछा कि यह अभियान कबाड़खाने के पास ही क्यों चलाया? दाल में काला यह नजर आया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कार्यक्रम के लिए पहले कबाड़खाने से सामान खरीदा गया हो फिर उसे लोगों द्वारा बेचना दिखा दिया गया। अफसर कुछ भी कर सकते हैं।

इंदौर में जब स्वच्छता सर्वे टीम दस्तावेज जांच रही थी। उसी दौरान सराफा में एक सार्वजनिक शाैचालय के बाहर मेयर मालिनी गौड़ पहुंचीं तो अंदर सफाईकर्मी काम कर रहे थे। बाहर मौजूद महिला सफाईकर्मी ने बेखटके अंदर जा रही मेयर को टोक दिया कि मैडम पांच मिनट रुकिए। अंदर सफाई चल रही है। एक अफसर ने उससे कहा कि मेयर हैं, सफाई देखने ही आई हैं। तब वह बड़े भरोसे से बोलीं- अरे आप सही वक्त पर आईं। देखिए हम कितनी मेहनत कर रहे हैं इंदौर को नंबर वन बनाने के लिए।