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पॉकेटमार कलाकार के शो की सारी टिकट खरीदते हैं पुलिसवाले

90 मिनट की नाट्य प्रस्तुति के लिए एक निर्देशक कैसे काम करता है, कुछ परेशान भी होता है और कई चुनौतियों का सामना करते...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:20 AM IST
90 मिनट की नाट्य प्रस्तुति के लिए एक निर्देशक कैसे काम करता है, कुछ परेशान भी होता है और कई चुनौतियों का सामना करते हुए नाटक पर फोकस करता है। रंगमंच के कलाकार की ऐसी ही कहानी दिखाता है शहीद भवन में बुधवार को मंचित नाटक पॉकेटमार रंगमंडल। असगर वजाहत लिखित इस नाटक का निर्देशन प्रतीक शर्मा ने किया। जिसकी प्रस्तुति द कॉन्टिनम एकेडमी के कलाकारों ने दी। एमपीएसडी की अध्ययन अनुदान योजना के तहत मंचित इस नाटक की कहानी भगवान नामक एक चोर के जीवन के आसपास घूमती है। एक समय बाद वो रंगमंच का कलाकार बन जाता है। एक कलाकार के रूप में उसके जीवन में कुछ परेशानियां और चुनौतियां आती हैं, जिन्हें निर्देशक ने रियलिस्टिक फॉर्म में खूबसूरती से पेश किया। इस प्रस्तुति का यह दूसरा शो रहा, जिसमें फिल्मी दृश्यों की तर्ज पर फाइट सीन खास रहे, जिन्हें दर्शकों ने पसंद किया।

नाटक में दिखाया गया कि पॉकेटमार भगवान हीरो बनना चाहता है। अशिक्षित होने के कारण निर्देशक उसे मुख्य किरदार न देकर साइड किरदार निभाने को कहता है। इससे भगवान नाराज होता है और अलग रंग समूह बनाता है। रंगमंडल पॉकेटमार के इस समूह में नाटक तैयार किया जाता है, जिसमें सभी आर्टिस्ट पॉकेटमार होते हैं। यह लोग नाटक की रिहर्सल के लिए जगह, हॉल की बुकिंग जैसी परेशानियों से जूझते हैं। अंत में थिएटर हॉल के पैसे की व्यवस्था करने के लिए भगवान दोबारा चोरी करने जाता है आैर उसे पुलिस पकड़ लेती है। भगवान की कहानी सुनकर पुलिसवाले उसके शो की सारी टिकट खरीद लेते हैं।