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 क्यों हर मंत्र के आखिर में बोला जाता है स्वाहा?

 क्यों हर मंत्र के आखिर में बोला जाता है स्वाहा?  सर्वेश गुप्ता, इंदौर हवन या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:20 AM IST
 क्यों हर मंत्र के आखिर में बोला जाता है स्वाहा?

 सर्वेश गुप्ता, इंदौर

हवन या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में मंत्र पाठ करते हुए स्वाहा कहकर ही हवन सामग्री भगवान को अर्पित करते हैं। स्वाहा का अर्थ है सही रीति से पहुंचाना। दूसरे शब्दों में कहे तो जरूरी भौगिक पदार्थ को उसके प्रिय तक। दरअसल कोई भी यज्ञ तब तक सफल नहीं माना जा सकता है जब तक कि हवन का ग्रहण देवता न कर लें। लेकिन, देवता ऐसा ग्रहण तभी कर सकते हैं, जबकि अग्नि के द्वारा स्वाहा के माध्यम से अर्पण किया जाए। स्वाहा की उत्पत्ति से रोचक कहानी भी जुड़ी हुई है। इसके अनुसार, स्वाहा प्रकृति की ही एक कला थी, जिसका विवाह अग्नि के साथ देवताओं के आग्रह पर सम्पन्न हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं स्वाहा को ये वरदान दिया था कि केवल उसी के माध्यम से देवता हवन में अर्पित की जाने वाली समाग्री को ग्रहण कर पाएंगे।



 पीपल को न काटने के पीछे क्या है मान्यता?

 मयंक पाटीदार, भोपाल

धर्मशास्त्रों में कुछ पेड़ों के काटने की साफ मनाही है। ऐसे वृक्षों में पीपल का स्थान सबसे ऊपर है। माना जाता है कि पीपल को विष्णु का वरदान मिला है कि जो कोई शनिवार को पीपल की पूजा करेगा, उस पर लक्ष्मी की कृपा रहेगी। इसके उलट, पीपल को काटने वाले के घर की सुख-समृद्धि‍ नष्ट होने की आशंका रहती है। इससे लोग पीपल को काटने से बचते हैं। पीपल ज्यादा ऑक्सीजन छोड़कर पर्यावरण को लाभ पहुंचता है। इस महत्ता को ध्यान में रखकर भी शास्त्रों में इसे काटने की मनाही है। ऐसी मान्यता है कि पीपल की पूजा से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। अगर कोई पीपल के वृक्ष को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे शनि का कोप झेलना पड़ सकता है। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि अगर कोई पीपल को कटते हुए देखता भी है, तो उसे भी शनिदोष लगता है।

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