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बिजली कंपनियों के संविदाकर्मियों को परीक्षा लेकर करेंगे नियमित, विरोध में होली जलाएंगे

बिजली कंपनियों ने संविदा सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करत हुए नए नियम जारी कर दिए। इनके अनुसार संविदा कर्मचारियों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:20 AM IST

बिजली कंपनियों ने संविदा सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करत हुए नए नियम जारी कर दिए। इनके अनुसार संविदा कर्मचारियों को चार साल की सेवा होने पर सीधी भर्ती के नियमित पद पर प्रतियोगी परीक्षा के जरिए अलग मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। कंपनी ने लाइनमैन यानी लाइन स्टाफ के लिए 40 फीसदी एवं अन्य पदों पर 25 फीसदी पद आरक्षित भी कर दिए। इन नियमों में सुधार के लिए गठित समिति के सिफारिश के बाद यह निर्णय लिया गया है।

मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के अध्यक्ष रामेश राठौर, यूनाइटेड फोरम वीकेएस परिहार ने कहा कि यह वादा खिलाफी है। इसके विरोध में शुक्रवार को आदेश की होली जलाई जाएगी। भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में घोषणा पत्र के पेज नंबर 33 पर बिना परीक्षा लिए नियमित करने का वादा किया था। पिछले तीन साल में 15 बार आंदोलन किए।



विभागीय समिति की सिफारिश पर संविदा सेवा नियमों में बड़ा बदलाव

किसे क्या मिलेगा

चार्टर्ड अकाउंटेंट को 10 हजार

असिस्टेंट इंजीनियर्स को 13 हजार रुपए

जूनियर इंजीनियर को 6 हजार

कार्यालय सहायक श्रेणी-3 को 4 हजार रुपए

लाइन अटेंडेंट- 4 हजार

ये सुविधाएं भी मिलेंगी

काम के दौरान हादसा होने पर 4 लाख रुपए की आर्थिक मदद

10 दिन की मेडिकल लीव

यात्रा भत्ते की पात्रता

सरकारी आवास आवंटन

कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत 21 हजार रुपए से कम वेतन वालों का 4.75 फीसदी प्रीमियम कंपनी देगी

आदेश जारी, स्थानीय निकायों के 40 हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को होगा फायदा

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने रिटायरमेंट की आयु सीमा बढ़ाने संबंधी आदेश जारी कर दिया। मप्र नगर निगम, नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि इससे कई कैडर के करीब 40 हजार अधिकारियों व कर्मचारियों को फायदा होगा।

31 साल बाद एक साथ फायदा

रिटायरमेंट संबंधी सरकार के आदेश से निगम-मंडलों के अधिकारियों व कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के साथ 31 साल बाद एक साथ फायदा हो रहा है।महासंघ के चंद्रशेखर परसाई और अजय श्रीवास्तव ने बताया कि इससे पहले 1987 में तत्कालीन मोतीलाल वोरा सरकार ने नियमित कर्मचारियों के साथ ही निगम मंडलों के लिए चौथे वेतनमान का आदेश जारी किया था। इससे पहले और बाद में कभी भी प्रदेश के नियमित कर्मचारियों व निगम मंडलों के लिए कोई भी आदेश एक साथ जारी नहीं हुए। सातवें वेतनमान के आदेश को लेकर भी ऐसा ही हुआ।

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