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अपने प्राणाें की कीमत पर वचन निभाया था, इसलिए वीर तेजाजी सबके पूज्य हुए

पुतुल समारोह में वीर तेजाजी की कथा को धागा पुतलियों के माध्यम से प्रभावी प्रस्तुत दी गई। वीर तेजाजी की कहानी ...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:20 AM IST
पुतुल समारोह में वीर तेजाजी की कथा को धागा पुतलियों के माध्यम से प्रभावी प्रस्तुत दी गई।

वीर तेजाजी की कहानी

कहानी में दिखाया गया कि तेजाजी का विवाह बचपन में ही पनेर गांव में रायमलजी की पुत्री पेमल से हो जाता है। शादी के कुछ समय बाद पेमल को लेने तेजाजी ससुराल जाते हैं। रास्ते में वे एक सांप को बचाते हैं। वह सांप जोड़े के बिछुड़ जाने से क्रोधित था और तेजाजी को काटने लगता है, तब तेजाजी सांप को वचन देते हैं कि लौटते समय वह खुद उसके पास आएंगे। लौटन पर तेजाजी सांप के पास जाते हैं और सांप से कटवाते हैं। सुरसरा में उनकी मृत्यु हो जाती है और इसके बाद पेमल भी उनके साथ जान दे देती है। अंत में सांप उनकी वचनबद्धता देख उन्हें वरदान देता है और वे सांपों के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।