• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Bhopal News
  • News
  • ग्वालटोरिया तालाब निर्माण को लेकर 24 गांवों के किसान जुटे, कल बनेगी आंदाेलन की रणनीित
--Advertisement--

ग्वालटोरिया तालाब निर्माण को लेकर 24 गांवों के किसान जुटे, कल बनेगी आंदाेलन की रणनीित

ग्राम खर्राखेड़ा में रविवार को ग्वालटोरिया के तालाब निर्माण के संबंध में क्षेत्र के किसानों ने एक बैठक रखी। बैठक...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:25 AM IST
ग्राम खर्राखेड़ा में रविवार को ग्वालटोरिया के तालाब निर्माण के संबंध में क्षेत्र के किसानों ने एक बैठक रखी। बैठक में पानी की समस्या हल न होने पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। ग्रामीणों ग्वाल टोरिया तालाब निर्माण की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। इसके निर्माण को लेकर पूर्व में तालाब बनवाने की मांग को लेकर दो बार भोपाल पहुंचे थे। जिसमें दूसरी बार भी ग्रामीणों की मुलाकात मुख्यमंत्री से नहीं हो सकी थी।

ग्रामीणों ने वहां मौजूद अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था। ग्रामीणों ने इसके पूर्व कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर समस्या हल करने के लिए भी ज्ञापन दिया था। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की समस्या क्षेत्र के करीब 30 गांवों की हैं। क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।

इस साल कम बारिश की वजह से गांवों में जलसंकट बढ़ा है। ग्रामीणों ने इस समस्या को हल करने के लिए बरनी नदी ग्वाल टोरिया तालाब निर्माण की मांग की है। जिससे राजस्थान सीमा पर स्थित इन गांवों की समस्या हल हो सके। यूं तो क्षेत्र में सबसे अधिक बांध और तालाब बमोरी में है जिनमें मकरावदा,भैंसाटोरी, बाढ़ियानाला, रामपुर तालाब हैं। लेकिन ग्रामीणों की माने तो क्षेत्र में पानी संग्रहण के लिए कोई मजबूत तंत्र नहीं है। वहीं बमोरी के हीरामन तालाब व छोटे तालाबों का भी गहरीकरण न होने से क्षेत्र में पानी समस्या गहरा जाती है।

इस तालाब के बनने से डेहरा परांठ, खर्राखेड़ा, बारोदिया, दोहरदा, टुईयाखेड़ा, कारीओट, कपासी, छतरपुरा, राधापुरा, अनारद, धनोरिया, सिलावटी, सिलेटा, चीतोड़ा, चीतौड़ी, वर्धा, माना, पाडौन, जैतपुरा, जौहरी, गोविंदपुरा, मानकपुरा सहित अन्य गांवों को सिंचाई के लिए पानी का लाभ मिल सकेगा। ग्रामीणों अपनी मांगों को लेकर आगामी बैठक 3 अप्रैल को परांठ में रखने का निर्णय लिया है।

ग्वालटोरिया तालाब निर्माण के लिए हुई बैठक में मौजूद दो दर्जन से अधिक गांवों के किसान।