--Advertisement--

पांच साल से खराब हैं लैब के 42 में से 23 उपकरण

हरेकृष्ण दुबोलिया | भोपाल एनवायर्नमेंट प्लानिंग एंड को-ऑर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन (एप्को) की रिसर्च लैब में 60%...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:25 AM IST
पांच साल से खराब हैं लैब के 42 में से 23 उपकरण
हरेकृष्ण दुबोलिया | भोपाल

एनवायर्नमेंट प्लानिंग एंड को-ऑर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन (एप्को) की रिसर्च लैब में 60% उपकरण खराब हो चुके हैं। लैब में मौजूद डेढ़ करोड़ से अधिक कीमत के 42 साइंटिफिक उपकरणों में से 23 ऐसे हैं, जो अब किसी काम के नहीं हैं। वहीं 8 उपकरण आउटडेटेट हो चुके हैं, इसलिए इनके निष्कर्ष अब किसी मतलब के नहीं होते। पांच साल से इस लैब में न तो किसी उपकरण का मेंटेनेंस कराया गया है और न ही किसी उपकरण का लैब से निरस्तीकरण (राइटऑफ) किया गया है।

साफ जाहिर है कि एयर और वाटर एक्ट के तहत राज्य की एकमात्र अधिसूचित यह स्टेट लैब बंद पड़ी हुई है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में एप्को ने बताया है कि 2004 के बाद लैब में कोई नया उपकरण नहीं खरीदा गया है। गौरतलब है कि इस एनवायर्नमेंट रिसर्च लैब की स्थापना भोज वेटलैंट प्रोजेक्ट के वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सब-प्रोजेक्ट के तहत 1997 में की गई थी। भोज वेटलैंड प्रोजेक्ट के तहत बड़ा तालाब समेत अन्य झील और जलाशयों में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और सुधार कार्य किए जाने की शर्त शामिल थी। तालाब के पानी की पीरियोडिकली जांच के लिए यह लैब बनाई गई थी। लैब की स्थापना के बाद लेक कंजर्वेशन अथॉरिटी को भी एप्को में मर्ज कर दिया गया था। लैब में 42 में से 40 उपकरण पानी की गुणवत्ता की जांच संबंधी हैं, जबकि एक-एक उपकरण हवा और मिट्‌टी की जांच संबंधी है।

एक करोड़ 50 लाख रुपए से अधिक के उपकरण हैं लैब में

पांच साल से न किसी उपकरण को ठीक कराया, न ही नए खरीदे

इसलिए बना था एप्को

एक स्वशासी संस्था के रूप में 1981 में एप्को की स्थापना की गई थी। एप्को को जलवायु परिवर्तन मुद्दों पर राज्य की नोडल एजेंसी घोषित किया गया था। बाद में भोज वेटलैंड प्रोजेक्ट के तहत बनी लेक कंर्जवेशन अथॉरिटी को इसमें मर्ज कर दिया गया और एप्को को स्टेट वेडलैंड अथॉरिटी बना दिया गया। शाहपुरा स्थित 50 एकड के पर्यावास परिसर में मौजूद इस संगठन की भूमिका अब शोध के बजाए भवन निर्माण और सेमिनारों तक सीमित रह गई है।

15 उपकरण खराब होने के कारण किसी काम के ही नहीं, 8 आउटडेटेड

ये उपकरण खराब

लेमिनार एयरफ्लो, मल्टी पैरामीटर वाटर क्वालिटी असेसमेंट सिस्टम, बीओडी इनक्यूबेटर (मैक), रोटरी वैक्यूम इवोपोरेटर, रेफ्रीजरेटर, हाईस्पीड सेंट्रीफ्यूग, बोम्ब केलोरीमीटर, ऑटोमैटिक लूप स्टेरिलाइजर, ऑटोक्लेव, डिजिटल इलेक्ट्रोनिक बैलेंस (स्केलटेक) आदि।

कैसे होगा शोधकार्य


...और इन्हें कुछ पता ही नहीं

एप्को के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर एंड वैटलैंड प्रभारी डॉ. विनीता विपट का कहना है कि मुझे कोई जानकारी नहीं हैं। इस संबंध में लैब इंचार्ज लोकेंद्र ठक्कर ही ठीक से बता सकते हैं। वहीं जब इस संबंध में हमने एनवायर्नमेंट लैबोरेटरी के प्रभारी लोकेंद्र ठक्कर से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कोई जवाब ही नहीं दिया।

X
पांच साल से खराब हैं लैब के 42 में से 23 उपकरण
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..