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"पकवाघर' में देखने को मिला मुस्लिम परिवार की लड़की का विद्रोह, अंतर्द्वंद्व

मप्र नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित नवागत नाट्य समारोह में रविवार को दो नाटकों पकवाघर और शून्य की प्रस्तुति दी गई।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:30 AM IST

मप्र नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित नवागत नाट्य समारोह में रविवार को दो नाटकों पकवाघर और शून्य की प्रस्तुति दी गई। बिहार के मो. जहांगीर के निर्देशन में नाटक पकवाघर का मंचन हुआ, जो कि ऋषिकेश सुलभ की एक कहानी खुला का नाट्य रूपांतरण था। जहांगीर ने कहानी में कोई भी फेर-बदल किए बिना इसे सूत्रधारों के माध्यम से बयां किया। यह मुस्लिम परिवार की एक ऐसी लड़की की कहानी है, जो बचपन में पक्के किए गए रिश्ते से खुला लेकर पसंद के लड़के से निकाह करना चाहती है। पुरुषों के वर्चस्व वाले घर में इस लड़की का यह एलान सबको चौंका देता है। नाटक लुबना नाम की इस लड़की का अंर्तद्वंद्व दिखाता है।

मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय का आयोजन

शून्य में किन्नरों का संघर्ष

रविवार को यहां दूसरे नाटक के रूप में सागर की दीक्षा साहू लिखित व निर्देशित नाटक शून्य की प्रस्तुति दी गई। किन्नरों के बीच अपनी रिसर्च के दौरान उन्हें इस विषय पर नाटक लिखने की प्रेरणा मिली। नाटक में दिखाया गया कि समाज धर्म और जाति के आधार पर ही नहीं बंटा, बल्कि इस बंटवारे का एक रूप किन्नर समुदाय भी हैं। इसी कहनी के इस नाटक में बयां किया गया।

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