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कॉल सेंटर से एक ही जवाब- अपने साधन से मरीज को अस्पताल पहुंचाएं

एम्बुलेंस 108 के कर्मचारियों के हड़ताल पर होने से कुछ लोग पुलिस के डायल 100 वाहन और निजी साधनों से अस्पताल पहुंचे। 108 के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:10 AM IST

कॉल सेंटर से एक ही जवाब- अपने साधन से मरीज को अस्पताल पहुंचाएं
एम्बुलेंस 108 के कर्मचारियों के हड़ताल पर होने से कुछ लोग पुलिस के डायल 100 वाहन और निजी साधनों से अस्पताल पहुंचे। 108 के कर्मचारी संगठन ने आधा दर्जन मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इससे मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है। इसके चलते बुधवार को शहर में मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी है।

जिगित्सा हेल्थ केयर कंपनी में काम करने वाले एंबुलेंस कर्मचारी संघ के सचिव असलम खान ने बताया कि प्रदेश में 606 एंबुलेंस का संचालन होता है। जबकि इसमें करीब 3100 कर्मचारी रोजाना तय समय पर ड्यूटी करते हैं। लेकिन हर महीने मिलने वाली सैलरी में 500 से एक हजार रुपए कम दिए जा रहे हैं। इसकी शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती है। काम के घंटे भी कम नहीं हुए हैं। इसके चलते सभी ने हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि जिगित्सा हेल्थ केयर को 606 एंबुलेंस का संचालन करने के बाद लगाए गए बिल के एवज में करीब 5 करोड़ रुपए एनएचएम द्वारा दिया जाता है। गाड़ी ऑफ रोड होने पर जुर्माना लगाया जाता है।

कर्मचारियों की मांगें... ड्राइवर और ईएमटी का काम 12 की जगह 8 घंटे हो

केस-1

संपर्क नहीं हो पा रहा है...

एयरपोर्ट रोड पर में बुधवार दोपहर पौने 2 बजे रोड एक्सीडेंट में गिरे रमेश (41) को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नंबर पर फोन किया गया। कॉल सेंटर से दो मिनट बाद जवाब मिला गांधी नगर की एंबुलेंस से संपर्क नहीं हो पा रहा है। पास की निशातपुरा की एंबुलेंस की मांग की गई। करीब 8 मिनट फोन होल्ड में रखने के बाद 108 की तरफ से जवाब आया कि किसी वाहन से संपर्क नहीं हो पा रहा। आप अपने साधन से ले जाइए।

सीधी बात

एंबुलेंस ऑपरेशन कंपनी का मैनेजमेंट सही नहीं

108 की एक साल में 5 बार हड़ताल हो चुकी हैं। क्या वजह है?

जिगित्सा हेल्थ केयर एंबुलेंस 108 का संचालन करती है। कंपनी का मैनेजमेंट सही नहीं हैं।

सरकार ईएमटी व पायलट की मांगों का निराकरण क्यों नहीं करा रही ?

एंबुलेंस स्टॉफ की मांगों का निराकरण तभी संभव है, जब ईएमटी और पायलट अपनी मांगों के निराकरण के लिए विभाग के अफसरों को समय दें। एंबुलेंस स्टॉफ भी कंपनी को ब्लैकमेल कर रहा है।

जिगित्सा हेल्थ केयर राजस्थान में ब्लैक लिस्टेड है। फिर भी उसे मप्र में काम दिया?

कंपनी ब्लैक लिस्टेड नहीं है। दस्तावेजों की जांच के बाद उसे काम सौंपा।

गौरी सिंह, स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव

तय सैलरी से 500 से 1 हजार रुपए कम मिलने पर कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला लिया। ड्राइवर को 16 हजार व ईएमटी को 19 हजार वेतन दिया जाए। अभी 9 हजार से 11 हजार वेतन मिल रहा है।

ड्राइवर, ईएमटी का काम 12 की जगह 8 घंटे किया जाए।

108 एंबुलेंस को ठेके से मुक्त कर संचालन स्वास्थ्य विभाग को दें। समय पर वेतन और ग्रेज्युटी का भुगतान किया जाए। जेडएचल के अफसर कर्मचारियों से दुर्व्यवहार व नौकरी से निकलवाने की धमकी देते हैं। यह बंद हो।

केस-2

ऑटो ढूंढ़ने में ही बेकार हुए 45 मिनट

अंबेडकर नगर की रहने वाली कला बाई सुबह 11 बजे घर में फिसल कर गिर गईं। उनके सिर में गंभीर चोट आई। 108 एंबुलेंस की हड़ताल के चलते उनके भाई दिलीप पटेल पास से ऑटो लेने गए। यहां ऑटो नहीं मिला तो दूसरी जगह गए। इसमें करीब 45 मिनट बेकार हो गए। हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर कहा कि मरीज के सिर से ज्यादा खून बह रहा था, और देर होती तो हालत बिगड़ सकती थी। शाम को उनको छुट्टी दे दी गई।

सिर्फ 70 गाड़ियों के बंद होने की रिपोर्ट मिली है

इंदौर, ग्वालियर, भोपाल में करीब 70 गाड़ियां बंद होने की जानकारी मिली है। इसके चलते जिगित्सा कंपनी के अफसरों को वैकल्पिक ड्राइवर रखने के लिए कहा गया है। बृजेश सक्सेना, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एनएचएम

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