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देश को 22 पदक दिलाने वाली पूनम अदालत से जीतीं, सिस्टम से हारीं, इस्तीफा ही देना पड़ा

करीब पांच माह के संघर्ष के बाद हाई कोर्ट से केस जीतने देश की पहली महिला अर्जुन अवार्डी जूडोका पूनम चोपड़ा आखिरकार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:15 AM IST

करीब पांच माह के संघर्ष के बाद हाई कोर्ट से केस जीतने देश की पहली महिला अर्जुन अवार्डी जूडोका पूनम चोपड़ा आखिरकार सिस्टम से हार गईं और केस जीतने के महज दो हफ्ते बाद ही इस्तीफा दे दिया। एशियन गेम्स में देश के लिए कांस्य पदक जीतने वाली पूनम ने बुधवार को खेल संचालनालय को इस्तीफा सौंप दिया है। कारण है खेल विभाग का सिस्टम।

दरअसल करीब चार महीने पहले अकादमी की खिलाड़ी अंतिम यादव ने खेल संचालक को लिखित शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि कोच पूनम ने उनके साथ मारपीट की, गला भी दबाया। मैं जैसे-तैसे कमरे से बाहर निकलकर आई हूं। इसी शिकायत पर खेल संचालक ने जांच कराई। कोच पूनम से पूछताछ हुई। मामला पुलिस तक पहुंचा। कोच और खिलाड़ी दोनों ने ही एक दूसरे के खिलाफ एफआईआर कराई। इसी बीच पूनम कोच पद से हटा दी गईं। उन्होंने कोर्ट का रुख किया। वहां से जीतकर आईं। पुन: ज्वाइन किया। अब इस्तीफा दे दिया। कहा-मजबूरी में फैसला लिया।

इस्तीफा क्यों...

हाई कोर्ट से केस जीतने के बाद भी अपने इस्तीफा क्यों दे दिया?

यहां खेलों का माहौल नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी मुझे साजिश के तहत प्रैक्टिस से दूर रखा गया। इतना ही नहीं, विभाग ने 14 फरवरी को नए कोच की नियुक्ति के लिए विज्ञापन भी जारी किया है। एक अधिकारी ने मुझसे कहा कि कोर्ट से तो जीत गईं हो, लेकिन यहां काम नहीं करने देंगे। ऐसे में मुझे समझ में आ गया है कि अधिकारियों ने मुझे फिर निकालने का मन बना लिया है। इन सभी बातों के कारण मैंने इस्तीफा दे दिया है। ये बच्चों पर फिर से शिकायत करने का दबाव बना रहे हैं और मैं इस लड़ाई में बच्चों को बीच में नहीं लाना चाहती।

यदि आपको बाद में इस्तीफा ही देना था तो फिर कोर्ट केस क्यों किया?

आत्म सम्मान और बच्चों के लिए, क्योंकि अधिकारियों ने उस दिन जिस तरह से अपशब्द कहे थे, मैं उन्हें भूल नहीं पा रही थी। इस आदेश के बाद मेरा सम्मान वापस आ गया। दूसरी बात जो बच्चे मुझे प्रेरणास्रोत मानते थे, मैं उनकी उनकी नजरों में रहूंगी।

कार्यकाल के दौरान बच्चाें के साथ कैसे अनुभव रहे हैं?

मैंने इन बच्चों के साथ चार माह तक नि:स्वार्थ भाव से तपस्या की है। इसमें मेरा कोई लालच और स्वार्थ नहीं था। मैं खिलाड़ियों को अपने पारिवारिक सदस्य की तरह ट्रीट करती थी। मैं सोचती थी कि इनमें से कोई खिलाड़ी ही मेरा रिकॉर्ड तोड़े। बच्चों के लिए कई सपने देखे थे। लेकिन मुझे जाना पड़ रहा है इस विवाद के बाद कुछ बच्चे रोने लगे और कहा कि मैडम आप मत जाइए। हम अकादमी छोड़ देंगे।

खिलाड़ी अंतिम यादव लेकर विवाद हुआ, उसके बारे में आपकी क्या राय है?

ईमानदारी से कहूं तो मैं उसे उतनी ज्यादा ट्रेनिंग नहीं दे पाई, क्योंकि ज्वाइन करने के छह दिन बाद ही बच्चों को औरंगाबाद जाना था। मैं वहां इन बच्चों का खेल देखने गई थी कि यह बच्चे कहां स्टेंड करते हैं। वहीं अंतिम का खेल देखा था। वहां मैंने उसे कुछ बातें बताई थी। जब वह यूथ कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जा रही थी, तो दिल्ली में अपनी बहन के यहां दस दिन तक रुकवाया । उसे अभ्यास कराया, अपने बच्चे की तरह खिलाया-पिलाया। यहां तक कि एयरपोर्ट भी छोड़ने गई। जब उसे लंदन में 40 हजार रुपए की जरूरत थी और सरकार पैसा नहीं पहुंचा पा रही थी, तब उसने पहला फोन मुझे ही किया था और मैंने बिना कुछ सोचे ही मदद की थी। लेकिन मेरी ज्यादा सिंसियॉरिटी और डिसिप्लिन उसे पसंद नहीं अाया।

यहां काम करना कोई खेल नहीं है, इनसे नहीं जीत सकती...

दुनिया भर में हासिल चमकदार कामयाबियां

मुख्य पदक

एशियन गेम्स (1994) कांस्य पदक

एशियन चैंपियनशिप (1993) रजत पदक

अन्य उपलब्धियां

वर्ल्ड चैंपियनशिप में सातवीं रैंक अटलांटा ओलिंपिक 1996 में भागीदारी देश की पहली महिला अर्जुन अवॉर्डी जूडोका 35 बार देश का प्रतिनिधित्व किया अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में

22 अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाए देश को।

मुझे जानकारी नहीं

इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है, हो सकता है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया हो। उपेंद्र जैन, संचालक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग

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Web Title: देश को 22 पदक दिलाने वाली पूनम अदालत से जीतीं, सिस्टम से हारीं, इस्तीफा ही देना पड़ा
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