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वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग भंग मंत्री को बताना मुनासिब ही नहीं समझा

प्रदेश सरकार द्वारा पांच साल पूर्व गठित मप्र राज्य वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग को खामोशी से समाप्त कर दिया गया है। 4...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:15 AM IST

वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग भंग मंत्री को बताना मुनासिब ही नहीं समझा
प्रदेश सरकार द्वारा पांच साल पूर्व गठित मप्र राज्य वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग को खामोशी से समाप्त कर दिया गया है। 4 साल 11 महीने के कार्यकाल वाले इस आयोग को भंग हुए करीब एक माह भी बीत चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आयोग का गठन करने वाले सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग के मंत्री को ही इसकी जानकारी नहीं है। विभाग ने 22 जनवरी को एक आदेश जारी किया था, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों की राज्य परिषद के गठन के लिए उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। आदेश में स्पष्ट किया था कि राज्य परिषद के गठन दिनांक से ही वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग का कार्यकाल स्वत: ही समाप्त माना जाएगा। सामाजिक न्याय विभाग के अवर सचिव चंद्रकांत कश्यप ने यह आदेश जारी किया था। इसी आदेश के अगले दिन से ही अध्यक्ष समेत आयोग के स्टाफ को कार्यमुक्त कर दिया गया।

कहां गई वरिष्ठ नागरिक नीति पता ही नहीं: सरकार ने जिस उद्देश्य से आयोग बनाया था, सरकार ने उसे अब ठंडे बस्ते में ही डाल दिया है। आयोग का गठन प्रदेश के लिए खुद की एक वरिष्ठ नागरिक कल्याण नीति बनाने के लिए किया गया था। 2015 में दो साल की मेहनत के बाद मसौदा तैयार किया था, लेकिन इस नीति पर सरकार ने अब तक कोई निर्णय लेना तो दूर इसे स्वीकार ही नहीं किया है। पिछले ढ़ाई साल से प्रदेश की वरिष्ठ नागरिक नीति विभाग की फाइलों में ही दफन धूल खा रही है।

2015 में दो साल की मेहनत के बाद तैयार हुआ था वरिष्ठ नागरिकों के लिए मसौदा, लेकिन सरकार ने अब तक इस नीति पर कोई निर्णय लेना तो दूर इसे स्वीकार ही नहीं किया, ढ़ाई साल से विभाग की फाइलों में धूल खा रही है सीनियर सिटीजन पॉलिसी

सामाजिक न्याय विभाग ने 22 जनवरी को आदेश जारी कर खत्म किया आयोग

विभाग का तर्क

सामाजिक न्याय विभाग का तर्क है कि आयोग का गठन सिर्फ वरिष्ठ नागरिक नीति बनाने के लिए किया गया था। विभाग के संयुक्त संचालक आलोक शर्मा के मुताबिक आयोग द्वारा बनाई गई नीति का अब कोई महत्व नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार ने एक राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक कल्याण की विस्तृत नीति बनाकर जारी कर दी है। अब यदि राज्य की अलग नीति लागू की जाएगी तो यह केंद्र की नीति को ओवररूल करेगी।

मंत्री बोले- न तो आयोग बंद हुआ है और न ही ऐसा कोई नोटिफिकेशन जारी किया गया है

22 जनवरी से आयोग समाप्त हो चुका है। मैं अब इस जिम्मेदारी से मुक्त हूं, लेकिन मुझे इस बात का अफसोस है कि हमने बड़ी मेहनत से प्रदेश के लिए वरिष्ठ नागरिक नीति तैयार की थी, लेकिन इसे लागू करना तो दूर अब तक राज्य कैबिनेट ने अंगीकृत तक नहीं किया है। आयोग का उद्देश्य यही था कि वरिष्ठ नागरिक कल्याण के लिए राज्य की एक स्थाई नीति बने। - वीजी धर्माधिकारी, पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग

80करोड़ प्रदेश की कुल बुजुर्ग आबादी

44 विभागों को कीं 488 सिफारिशें

आयोग ने कुल 488 सिफारिशें सरकार को भेजीं। इनमें से 450 सिफारिशें सरकार ने मान लीं और 44 अलग-अलग विभागों को इन्हें लागू करने के लिए आदेश जारी कर दिए, लेकिन मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं होने से इन्हें ठीक से लागू ही नहीं किया जा सका। करीब 38 सिफारिशें ऐसी हैं, जिनमें वित्तीय खर्च से जुड़ी बाधाओं के कारण सरकार ने इन्हें स्वीकार नहीं किया। आयोग के अध्यक्ष रिटायर आईएएस अफसर रहे वीजी धर्माधिकारी के मुताबिक केंद्र सरकार की मोहिनी गिरी कमेटी ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए केंद्र और राज्यों में संवैधानिक अधिकारयुक्त एक स्वतंत्र आयोग के गठन की सिफारिश की थी, लेकिन वैसा अधिकार संपन्न आयोग बनाया ही नहीं गया। हमनें जो भी सिफारिशें और नीति तैयार कीं यदि उन्हें लागू नहीं किया गया तो इस आयोग के बनाने का कोई औचित्य नहीं रहेगा।

आयोग का दफ्तर भी कराया खाली

आयोग का माचना कॉलोनी स्थित डी-12 में संचालित दफ्तर खाली करा सारा रिकॉर्ड शिवाजी नगर स्थित सामाजिक न्याय मुख्यालय में शिफ्ट कर दिया गया है।

88वृद्धाश्रम हैं पूरे प्रदेश में

राज्य वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग अभी बंद नहीं किया गया है। न ही ऐसा कोई नोटिफिकेशन जारी किया गया है। उम्र अधिक हो जाने से सिर्फ अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हुआ है। वरिष्ठ नागरिक नीति के बारे में मैं पता कराता हूं कि उसकी क्या स्थिति है। - गोपाल भार्गव, कैबिनेट मंत्री, सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग

73डे केयर सेंटर हैं प्रदेशभर में

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Web Title: वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग भंग मंत्री को बताना मुनासिब ही नहीं समझा
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