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98 लाख बेरोजगारों से 430 करोड़ फीस ली, नौकरी कितनों को दी रिकॉर्ड ही नहीं

व्यापमं - 86 लाख परीक्षार्थी, 71122 पद परीक्षा फीस- 350 करोड़ रुपए 2.5 करोड़ में 50 लाख शिक्षित बेरोजगार 33 से 35 साल के ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:20 AM IST

व्यापमं- 86 लाख परीक्षार्थी, 71122 पद परीक्षा फीस- 350 करोड़ रुपए

2.5 करोड़ में 50 लाख शिक्षित बेरोजगार 33 से 35 साल के

योगेश पाण्डे | भोपाल

मध्यप्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति साल दर साल भयावह होती जा रही है। इधर रिटायरमेंट की उम्र 60 से 62 वर्ष करने के आदेश से बेरोजगारों की रही-सही उम्मीदें भी टूट रही हंै। प्रदेश में ढाई करोड़ में 50 लाख शिक्षित बेरोजगार युवा 33 से 35 साल की उम्र के हैं। यानी दो साल में इनकी नौकरी की अर्हता खत्म हो जाएगी। इधर सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को अपने मुनाफे का धंधा बना लिया है। बीते पांच साल के व्यापमं के रिकाॅर्ड को खंगाले तो पता चला कि 86 लाख बेरोजगारों ने अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं के नाम पर 350 करोड़ की परीक्षा फीस दी है। पीएससी में पांच साल में 12 लाख छात्रों ने 80 करोड़ रुपए फीस दी है। हालांकि नौकरी कितनों को मिली, इसका सीधा जवाब सरकार के पास भी नहीं है। आर्थिक सर्वेक्षण में भी सरकार ने इसका कहीं उल्लेख नहीं किया है। शेष पेज 11 पर





प्रशासनिक क्षेत्र में नौकरी-

31 मार्च 2017 की स्थिति में राज्य में कुल 739771 कर्मचारी कार्यरत रहे। कुल शासकीय कर्मचारियों में वर्ष 2016 की अपेक्षा वर्ष 2017 में 0.59 फीसदी की कमी हुई।

शासकीय विभागों में नियमित कर्मचारी- 447262

सार्वजनिक उपक्रम एवं अर्द्धशासकीय संस्थाओं में- 59634

नगरीय स्थानीय निकायों में- 85961

ग्रामीण स्थानीय निकायों में- 138855

विकास प्राधिकरण एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण- 1687

विश्वविद्यालयों में- 6372

अलग-अलग विभागों में रिक्त पदों की औसत संख्या 50 फीसदी है।

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कारखानों में नौकरी

राज्य में कुल 15556 कारखाने पंजीकृत हैं। इसमें नियोजन क्षमता 862012 है। हालांकि इसमें कितने रोजगार हैं, सरकार के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है। एफएमपीसीसीआई के अध्यक्ष आरएस गोस्वामी कहते हैं कि प्रदेश में माइक्रो और स्माल इंडस्ट्री पर सरकार का फोकस ही नहीं है। सरकार चाहे तो सबसे ज्यादा रोजगार इसी सेक्टर में बढ़ सकते हैं। सरकारी नीतियों के कारण बड़ी इंडस्ट्री भी यहां आने में दिलचस्पी नहीं ले रही है। गोस्वामी कहते हैं कि मध्यप्रदेश में छोटी-बड़ी इंडस्ट्रियों में कुल 11 लाख से ज्यादा रोजगार नहीं हैं।

2017 : तीन एग्जाम, कहीं परीक्षा रद्द तो कहीं रिजल्ट पर रोक

पटवारी परीक्षा

अक्टूबर 2017 : 9 हजार पद

फीस-38 करोड़ रुपए

हुआ क्या- 9 दिसंबर से परीक्षा शुरू हुई। 10.20 लाख परीक्षार्थी थे। दावा था कि जनवरी में रिजल्ट मिल जाएंगे। लेकिन 26 मार्च को रिजल्ट घोषित हुए हैं। नियुक्ति कब मिलेगी, पता नहीं।



संविदा कर्मचारियों के भरोसे सिस्टम

सरकारी विभागों में आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। संविदा कर्मचारियों के भरोसे सिस्टम चल रहा है। सरकार की नीतियां और विजन के कारण ऐसा हुआ है। व्यापमं का काम प्रवेश परीक्षाएं कराना था। धांधली और अक्षमता उजागर होने के बाद भी व्यापमं से भर्ती परीक्षाएं करवाना संदेह पैदा करता है। कैडर मैनेजमेंट गड़बड़ा गया है। पहले यह होता था कि कितने पद रिक्त होने वाले हैं, उससे पहले नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती थी। अब तो कुछ भी कहना मुश्किल है।

पांच साल में भर्ती परीक्षाओं के नाम पर युवाओं से वसूली

पीएससी- 12 लाख परीक्षार्थी, 5 हजार पद परीक्षा फीस- 80 करोड़ रुपए

12 दिसंबर 2017 : 209 पद

फीस- 12 करोड़ रुपए

हुआ क्या- 18 फरवरी 2018 को परीक्षा हुई, लेकिन प्रश्न पत्र के सवालों पर सवाल उठ गए। हाईकोर्ट ने पीएससी प्री के रिजल्ट पर रोक लगा दी। 2.80 लाख छात्रों का भविष्य अधर में है।

केएस शर्मा, रिटा. मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश

एमपीपीएससी

बेरोजगारी से तंग आकर हर साल 579 युवा कर रहे आत्महत्या

एनसीआरबी की रिपोर्ट को आधार मानें तो वर्ष 2001 में बेरोजगारी के कारण आत्महत्या करने वाले युवाओं की संख्या 84 थी, यह 2016 में 579 हो गई है। बेरोजगारी के कारण खुदकुशी करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। 15 साल में प्रदेश में कुल 1874 युवाओं ने बेरोजगारी से तंग आकर खुदकुशी की है।

अपेक्स बैंक

1 मार्च 2017 : 1600 पद

फीस- 4.20 करोड़ रुपए

हुआ क्या- 23 फरवरी को हाईकोर्ट के आदेश से परीक्षा रद्द, अब इस परीक्षा में शामिल छात्र सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।

आखिर कितनी नौकरियां मिलीं

सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण में नौकरियों की जानकारी नहीं दी है। सरकार ने बताया है कि 2015 में 732 और 2016 में 422 लोगों को रोजगार दिलाया गया। 2017 के रोजगार के आंकड़े नहीं बताए।

सरकार का एक और वादा

इस साल 89 हजार लोगों को नौकरी देंगे

भोपाल | राज्य सरकार इस साल स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास एवं राजस्व विभाग समेत अन्य विभागों मंे 89 हजार नई नियुक्तियां करने का दावा कर रही है। ये पद 1 अप्रैल से 31 मार्च 2019 के बीच भरे जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से स्कूल शिक्षा विभाग के तहत 60 हजार संविदा शिक्षकों की भर्ती शामिल है। इनमें से 30 हजार पद भरे जाने का प्रस्ताव स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से व्यापमं को भेजा गया था, लेकिन उसने इस भर्ती से मना कर दिया है। इसके बाद अब ये भर्तियां ओपन स्कूल के माध्यम से कराए जाने की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा अन्य 30 हजार पद अगले माह भरे जाएंगे। राजस्व विभाग के तहत 400 नायब तहसीलदार के पद भरे जाएंगे, जबकि 9500 पटवारियों की भर्ती की जा चुकी हैं। शेष पेज 11 पर













इसके अलावा 100 अन्य पद भी भरे जाने हैं। यानी राजस्व विभाग में 10 हजार भर्तियों की प्रक्रिया इस साल पूरी होगी। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग में 3500 पद भरे जाएंगे, जिनमें 1300 चिकित्सक, 700 पैरामेडिकल स्टाफ, 1053 स्टाफ नर्स और शहरी क्षेत्र में 500 एएनएम की भर्ती किया जाना प्रस्तावित है। पुलिस में 8 हजार सिपाही और होमगार्ड में 4 हजार भर्तियां की जाएंगी। महिला-बाल विकास विभाग में 3300 पद भरे जाएंगे जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के अलावा 700 पर्यवेक्षक सहित कुल 4 हजार पदों पर भर्ती होना है।

राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव अरुण पांडे का कहना है कि विभाग में पटवारियों की भर्ती की जा चुकी हैं। इसके अलावा 280 नए नायब तहसीलदार की भर्ती की प्रक्रिया होने के बाद, विभाग में इन अफसरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

62 में रिटायरमेंट

सीएम की घोषणा के एक दिन बाद अध्यादेश से फैसला लागू

31 मार्च को रिटायर होने थे 1500 अधिकारी-कर्मचारी... नहीं हुए

पॉलिटिकल रिपोर्टर |भोपाल

राज्य सरकार ने सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु दो साल बढ़ा दी है। 31 मार्च यानी शनिवार से अब कर्मचारी 60 के बजाय 62 साल में रिटायर होंगे। इसका सीधा फायदा 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले करीब 1500 कर्मचारियों को मिलेगा, जिनकी सेवा अवधि दो साल बढ़ गई है। इस बारे में सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्वीकृति दे दी और तत्काल बाद विधि विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। इसमें साफ कर दिया गया है कि यह सिर्फ शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों पर ही लागू होगा, इसकी परिधि में निगम, मंडल समेत अर्धशासकीय संस्थाओं के कर्मचारी नहीं आएंगे। यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोई घोषणा 24 घंटे बाद लागू हुई हो, जिसका फायदा सीधे-सीधे प्रदेश के 4 लाख 35 हजार अधिकारी-कर्मचारियों को मिलेगा। इससे पहले 2011-12 में सरकार ने कृषि कैबिनेट के गठन के संबंध में विशेष अध्यादेश जारी किया था।

आगे क्या होगा

छह महीने के भीतर सरकार को अध्यादेश को विधानसभा में विधेयक के रूप में प्रस्तुत कर पारित कराना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं होेने पर इसकी अवधि को बढ़ाने के लिए राज्यपाल से फिर से अनुरोध करना होगा। उल्लेखनीय है कि चूंकि राज्यपाल ने अध्यादेश को मंजूरी दी है। इसलिए कैबिनेट की इस संबंध में किसी भी प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी जरूरी नहीं होगी।

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