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कलेक्टर गाइडलाइन : धारा 47(क) खत्म, पर टारगेट के लिए बैठकें करते रहे अफसर

4 माह पहले तय हो गया था कि कलेक्टर गाइडलाइन बनाने की धारा धारा-47 (क) को विलोपित कर दिया गया है। इसकी जानकारी पंजीयन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:20 AM IST

4 माह पहले तय हो गया था कि कलेक्टर गाइडलाइन बनाने की धारा धारा-47 (क) को विलोपित कर दिया गया है। इसकी जानकारी पंजीयन विभाग के सब रजिस्ट्रार से लेकर वरिष्ठ अफसरों में थी। उसके बाद भी भोपाल में कलेक्टर गाइडलाइन बनाने को लेकर बैठकों का दौर चलता रहा, ताकि प्रॉपर्टी के खरीदारों में यह डर बैठाया जा सके कि 1 अप्रैल के बाद प्रॉपर्टी के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है। अफसरों की मंशा सिर्फ रजिस्ट्रियों से होने वाली आय थी। 31 मार्च तक भोपाल रजिस्ट्री दफ्तर में पदस्थ अफसरों को 695 करोड़ रुपए का टारगेट दिया गया था, लेकिन 8075 रजिस्ट्रियों से 550 करोड़ रुपए की आय हो पाई। अफसर टारगेट पूरा नहीं कर पाए। जबकि प्रदेश के सभी जिलों को मिला 4300 करोड़ रुपए के टारगेट के एवज में 4800 करोड़ रुपए का टारगेट पूरा किया गया। यानि सरकार द्वारा दिए गए टारगेट से 500 करोड़ ज्यादा की आय हुई है। सब रजिस्ट्रार संघ के दुष्यंत दीक्षित ने कहा कि आईजी पंजीयन कल्पना श्रीवास्तव ने हर महीने काम करने का तरीके और रिव्यू बैठकें बुलाई। इसी का नतीजा है कि विभाग को ज्यादा आय हुई। इधर, कल्पना श्रीवास्तव ने एक अप्रैल के बाद भी पुरानी गाइडलाइन की दरों पर ही रजिस्ट्री करने के निर्देश दिए हैं।

आगे भी पुरानी गाइडलाइन की दरों पर ही होंगी रजिस्ट्री

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