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सोहेल सलमान ने सेमी क्लासिकल ठुमरी में सुनाया सावन बीतो जाए पिहरवा

भारत भवन में उस्ताद हाफिज अली खान संगीत अकादमी की ओर से सरोद वादक उस्ताद रहमत अली खां की स्मृति में नृत्य-संगीत की...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 04:25 AM IST
भारत भवन में उस्ताद हाफिज अली खान संगीत अकादमी की ओर से सरोद वादक उस्ताद रहमत अली खां की स्मृति में नृत्य-संगीत की सभा का आयोजन किया गया। समारोह के दूसरे दिन की शुरुआत संगीत वादन से हुई। कर्नाटक मेंगलोर से आए सितार वादक उस्ताद रफीक खान ने राग पूरिया कल्याण में आलाप, जोड़, झाला के साथ वादन की पारंपरिक शुरआत की। इसमें इन्होंने मध्यलय रूपक ताल में और द्रुत तीन ताल में गतें बजाईं। गायकी और तंत्रकारी शैली को मिश्रित स्वरूप में बजाने वाले रफीक ने धुनें बजाईं।

दूसरी प्रस्तुति सोहेल खान और सलमान खान की राजस्थानी लोकगीतों की रही। सोहेल सलमान ने राजस्थानी लोकगीत ‘केसरिया बालम पधारो म्हारे देश..’ से गायन की शुरुआत की। बाद में इन्होंने सेमी-क्लासिकल में ठुमरी ‘सावन बीतो जाए पिहरवा..’ और ‘याद पिया की आए..’ पेश किया। आखिरी प्रस्तुति कविता साजी व उसके समूह की प्रस्तुतियां की रही।

प्रस्तुति की शुरुआत मोहिनीअट्‌टम शैली में पांच छात्राओं द्वारा गणेश स्तुति ‘श्री गणेशाय शरणम..’ से हुई। इसके बाद देवी के अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन कविता साजी ने देवी स्तुति ‘ओम क्लिमं श्री मात..’ पेश किया। कृष्ण स्तुति ‘चलिए कुंजन में..’ में नाट्यश्री साजी और श्यामल कड़वे ने मोहिनीअट्‌टम और भरतनाट्यम शैली में राधा-कृष्ण के संवादों को पेश किया। बाद में शिव स्तुति में रुद्र तांडव व तराना से प्रस्तुति का समापन हुआ।

भारत भवन में आयोजित हुई नृत्य-संगीत की सभा