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सरकार ने नहीं की नियुक्ति तो ज्यूडिशियल ऑर्डर से कर देंगे

लीगल रिपोर्टर| जबलपुर/भोपाल पिछले 8 सालों से खाली पड़े राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 14, 2018, 06:20 AM IST

लीगल रिपोर्टर| जबलपुर/भोपाल

पिछले 8 सालों से खाली पड़े राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति के प्रति सरकार के उदासीन रवैये पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। हाईकोर्ट ने कहा कि अब अगर सरकार ने उक्त पद पर नियुक्ति नहीं की तो हम ज्यूडीशियल ऑर्डर पारित कर नियुक्ति कर देंगे। इस आदेश के साथ चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय शुक्ला की खंडपीठ ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की है।

कोर्ट ने 9 फरवरी को आदेश दिए थे कि अगर 4 सप्ताह के भीतर चेयरमैन की नियुक्ति नहीं की तो सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा। मामले पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान सामान्य प्रशासन विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी प्रभांशु कमल हाजिर हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले में प्रशासनिक समिति को निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि एक फरवरी को बैठक हुई थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी।

ऐसे होता है गठन

मानवाधिकार आयोग अधिनियम 1993 की धारा 21 के तहत आयोग का गठन होता है। इसमें अध्यक्ष समेत 3 सदस्य होते हैं। आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट का सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस होता है। एक्ट की धारा 22 के तहत 4 सदस्यीय कमेटी अध्यक्ष का चुनाव करती है। कमेटी में मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और गृह मंत्री होते हैं। एक्ट की धारा 24 के तहत चेयरमैन का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। अधिकतम आयुसीमा 70 वर्ष निर्धारित है।

लीगल रिपोर्टर| जबलपुर/भोपाल

पिछले 8 सालों से खाली पड़े राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति के प्रति सरकार के उदासीन रवैये पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। हाईकोर्ट ने कहा कि अब अगर सरकार ने उक्त पद पर नियुक्ति नहीं की तो हम ज्यूडीशियल ऑर्डर पारित कर नियुक्ति कर देंगे। इस आदेश के साथ चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय शुक्ला की खंडपीठ ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की है।

कोर्ट ने 9 फरवरी को आदेश दिए थे कि अगर 4 सप्ताह के भीतर चेयरमैन की नियुक्ति नहीं की तो सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा। मामले पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान सामान्य प्रशासन विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी प्रभांशु कमल हाजिर हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले में प्रशासनिक समिति को निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि एक फरवरी को बैठक हुई थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी।

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