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अब केंद्र की योजनाओं में राज्य को खर्च करने होंगे 2354 करोड़ ज्यादा

केंद्र ने राज्य को विभिन्न केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में दी जाने वाली अनुदान राशि से हाथ खींच लिया है। इससे राज्य...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 07:20 AM IST

केंद्र ने राज्य को विभिन्न केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में दी जाने वाली अनुदान राशि से हाथ खींच लिया है। इससे राज्य सरकार को इन योजनाओं के लिए खजाने से करीब 2353 करोड़ ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। दरअसल उसे केंद्र से मिलने वाली मदद के एवज में 10,195 करोड़ रुपए के बजाय अब 7841 करोड़ रुपए ही मिलेंगे। यानी सीधे-सीधे प्रदेश सरकार पर 2354 करोड़ रुपए का भार आएगा। इसके बाद भी राज्य के अफसरों का कहना है कि केंद्र से मिलने वाले अनुदान की राशि घटी है तो केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी तो बढ़ गई है। यह राशि हम अपने हिसाब से खर्च कर सकते हैं। इसमें पहले की तरह बाध्यता नहीं होगी कि केंद्र से जो भी पैसा मिला है, वो उसी मद में खर्च हो, जिसके लिए दिया गया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़कों, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के संचालन में पहले से ज्यादा राशि खर्च करना पड़ेगी। अन्य प्रमुख योजनाओं में निर्मल भारत, राष्ट्रीय मिशन आॅफ आयुष, सर्वशिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थाओं में मूलभूत न्यूनतम सेवाओं की उपलब्धता, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना, समेकित बाल संरक्षण योजना, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान योजना, राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन, मध्याह्न भोजन कार्यक्रम, समस्यामूलक गांवों में पेयजल प्रदाय योजना।

इधर, ऐसे मिली अप्रत्यक्ष कर में हिस्सेदारी

राज्य सरकार को केंद्र से अप्रत्यक्ष करों के 2014-15 में 9652 करोड़ रुपए मिले थे, जबकि 2015-16 में 17888 करोड़ रुपए मिले। यानी 8236 करोड़ रुपए ज्यादा थे। इनमें 2014-15 में मिले अप्रत्यक्ष करों में सीमा शुल्क की राशि 3898 करोड़ रुपए, संघ उत्पाद शुल्क के 2201 करोड़ और सेवाकर के 3553 करोड़ रुपए थे। वहीं, 2015-16 में अप्रत्यक्ष करों में सीमा शुल्क की राशि 6133 करोड़, संघ उत्पाद शुल्क के 5100 करोड़ और सेवाकर के 6655 करोड़ रुपए थे।

प्रमुख योजनाएं, जिनमें बढ़ेगा खर्च

योजना राज्य सरकार पर भार

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना 748 करोड़

वाटरशेड विकास 75 करोड़ रुपए

एकीकृत बाल विकास सेवा 545 करोड़ रुपए

प्रधानमंत्री आवास योजना 144 करोड़ रुपए

सर्वशिक्षा अभियान 113 करोड़ रुपए

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 27 करोड़ रुपए

ग्रांट में कमी लेकिन केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बड़ी

केंद्र से मिलने वाली ग्रांट में कमी हुई है, लेकिन केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी भी बड़ी है। किस योजना में कितना हिस्सा केंद्र और राज्य का हो यह फाॅर्मूला बदलता रहता है। अब हमे केंद्र से जो राशि मिल रही है, उसका उपयोग प्राथमिकता के अनुसार कर सकते हैं। पहले केंद्र की शर्तों की बाध्यता के अनुसार ही खर्च करना पड़ता था। जयंत मलैया, वित्तमंत्री

ऐसे बढ़ा खर्च : पहले केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में केंद्र की हिस्सेदारी 75% और राज्य सरकार की महज 25% ही थी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में तो शत प्रतिशत राशि भारत सरकार से ही मिलती थी। नए तय हुए फार्मूले में सभी योजनाओं में 60% राशि केंद्र देगा तो 40% राज्य को मिलाना होगी।

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Web Title: अब केंद्र की योजनाओं में राज्य को खर्च करने होंगे 2354 करोड़ ज्यादा
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