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भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला साबित होगा ये बिल

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में सरकारी और प्राइवेट डॉक्टरों खुलकर सामने आ गए हैं। आईएमए ने 25 मार्च को दिल्ली...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:30 AM IST
नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में सरकारी और प्राइवेट डॉक्टरों खुलकर सामने आ गए हैं। आईएमए ने 25 मार्च को दिल्ली में तीन लाख से ज्यादा डॉक्टर्स की बिल के विरोध में महापंचायत बुलाई है। इसके पहले बिल को लेकर देशभर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्यों ने भारत यात्रा की शुरुआत की है। शनिवार को भोपाल पहुंचे आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वनखेड़कर ने तल्ख लहजे में कहा केंद्र डॉक्टर्स से बिना पूछे उनके खिलाफ कानून कार्रवाई के लिए मेडिकल कमीशन बिल ला रही है। बिल को संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा गया है। इस बिल को लाने के लिए पीछे सरकार की मंशा निजी मेडिकल कॉलेजों को फायदा पहुंचाने की है।

इस बिल में ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि निजी मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए संचालक को 6 साल का वक्त दिया जाएगा। तीन साल तक कोई इंस्पेक्शन नहीं होगा। जबकि वर्तमान व्यवस्था में कॉलेज खोलने से पहले अस्पताल, मेडिकल कॉलेज सहित सारी सुविधाएं होने के बाद मान्यता प्रदान की जाती है। लेकिन नई व्यवस्था में सिर्फ शपथ पत्र पर ही कॉलेज की अनुमति जारी कर दी जाएगी और यदि आगे कॉलेज नहीं चला तो इसका खामियाजा छात्राओं को उठाना पड़ेगा। मेडिकल संस्थानों की फीस ये कमीशन निजी मेडिकल संस्थानों की फीस भी तय करेगा लेकिन सिर्फ 40% सीटों पर ही। 60 फीसदी सीटों पर निजी संस्थान खुद फीस तय कर सकेंगे। इससे कॉलेज संचालक मनमानी करेंगे। छात्रों की परेशानी और ज्यादा बढ़ने वाली है।