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70 साल से संतनगर में बना रही घिय्यर

होली नजदीक आते ही संतनगर में खास तरह की जलेबी (घिय्यर) नजर आने लगती है। देश में जहां भी सिंधी समाज रहता है वहां होली...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:30 AM IST
होली नजदीक आते ही संतनगर में खास तरह की जलेबी (घिय्यर) नजर आने लगती है। देश में जहां भी सिंधी समाज रहता है वहां होली इस मिठाई के बिना नहीं मनती। हर मिठाई की दुकान पर घिय्यर बनाई जाती है। संतनगर में 70 साल से होली पर घिय्यर बनाई जा रही है। बाबुल के प्यार का प्रतीक भी है यह मिठाई। पर्व पर पिता के घर से बेटी के ससुराल घिय्यर व अन्य मिठाई भेजी जाती है। संतनगर में मिनी मार्केट रोड स्थित कृष्णा स्वीट्स संचालक संतोष तोतलानी ने बताया कि स्व. खानचंद ने संतनगर में घिय्यर बनाने की शुरुआत की थी। आज गलियों में भी बन रही है।

रंग पर्व पर सिंधी समाज का पारंपरिक पकवान होने के कारण लोग घिय्यर की खरीदी सबसे अधिक होती है। शायद ही ऐसा कोई सिंधी परिवार होगा, जो होली पर यह मिठाई न खाए।

पोस्ट रिपोर्टर | भोपाल

होली नजदीक आते ही संतनगर में खास तरह की जलेबी (घिय्यर) नजर आने लगती है। देश में जहां भी सिंधी समाज रहता है वहां होली इस मिठाई के बिना नहीं मनती। हर मिठाई की दुकान पर घिय्यर बनाई जाती है। संतनगर में 70 साल से होली पर घिय्यर बनाई जा रही है। बाबुल के प्यार का प्रतीक भी है यह मिठाई। पर्व पर पिता के घर से बेटी के ससुराल घिय्यर व अन्य मिठाई भेजी जाती है। संतनगर में मिनी मार्केट रोड स्थित कृष्णा स्वीट्स संचालक संतोष तोतलानी ने बताया कि स्व. खानचंद ने संतनगर में घिय्यर बनाने की शुरुआत की थी। आज गलियों में भी बन रही है।

रंग पर्व पर सिंधी समाज का पारंपरिक पकवान होने के कारण लोग घिय्यर की खरीदी सबसे अधिक होती है। शायद ही ऐसा कोई सिंधी परिवार होगा, जो होली पर यह मिठाई न खाए।

ऐसे होती है िघय्यर

आम जलेबियों की तरह ही घिय्यर की सामग्री तैयार की जाती है। फर्क सिर्फ इसके स्वाद और आकार का होता है। इसके स्वाद में थोड़ा खट्‌टापन और आकार थोड़ा बड़ा होता है। खाने में अलग ही स्वाद रहता है।

स्वाद लाजवाब