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24 हजार पद खाली इसलिए नहीं मिल रहे वीकली ऑफ

तनाव... औसतन हर तीसरे दिन हो रही 2 पुलिसकर्मियों की मौत पिछले साल मप्र विधानसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:15 PM IST
तनाव... औसतन हर तीसरे दिन हो रही 2 पुलिसकर्मियों की मौत

पिछले साल मप्र विधानसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने सदन में बताया था कि तनाव और बीमारी के कारण हर 3 दिन में औसतन 2 पुलिसकर्मियों की ऑन ड्यूटी मौत हो जाती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया था कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में पिछले तीन साल में 722 पुलिस कर्मियों की ऑन ड्यूटी मौत हुई है, इनमें से 27 ने आत्महत्या की है, जबकि 109 पुलिसकर्मियों की मौत ऑन ड्यूटी हार्ट अटैक से हुई है। कुछ मामलों को छोड़कर ज्यादातर मौतों के पीछे अत्यधिक तनाव, बीमारी में ठीक से इलाज नहीं करा पाना और लगातार थकान भरी स्थिति में नौकरी करना, काम के दौरान आला अफसरों की प्रताड़ना और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पाने का बोझ भी बड़ी वजह रही।

हरेकृष्ण दुबोलिया | भोपाल. प्रदेशभर के पुलिसकर्मियों को पिछले तीन साल में साप्ताहिक अवकाश देने की 4 घोषणाएं की जा चुकी हैं। चौथी घोषणा के बाद इन्हें पाक्षिक अवकाश (हर 15 दिन में एक बार) की व्यवस्था लागू हो चुकी है। यह व्यवस्था कितने दिन चल पाएगी, कहना मुश्किल है, क्योंकि प्रदेश में आरक्षक से टीआई तक के 24671 पद खाली हैं, जबकि बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए पुलिस को सामान्य गति से कामकाज के लिए कुल 30 हजार 71 पुलिसकर्मियों की जरूरत है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हर साल औसतन एक हजार पुलिसकर्मी रिटायर हो जाते हैं। जब तक हर साल रुटीन भर्ती प्रक्रिया नहीं चलाई जाएगी, तब तक बल की कमी स्थाई रूप से दूर नहीं की जा सकती है।

1,15,829

स्वीकृत पद हैं पूरे प्रदेश में पुलिस के

क्या है स्थिति

कैटेगरी स्वीकृत पद कार्यरत खाली पद

आरक्षक 68504 54488 14016

प्रधान आरक्षक 23604 19282 4322

सहा. उपनिरीक्षक 13101 9458 3643

उपनिरीक्षक 7927 5943 1985

सूबेदार 296 241 55

निरीक्षक (टीआई) 2159 1711 448

ट्रैफिक टीआई 238 76 162

91,158

पुलिसकर्मी कार्यरत हैं

24,671

पद खाली हैं वर्तमान में

इन जिलों ने लागू किया पाक्षिक अवकाश-भोपाल, देवास, उज्जैन

जन्मदिन पर छुट्‌टी देने वाले जिले- भोपाल, बुरहानपुर, आगर, शहडोल, देवास।

सिर्फ घोषणाएं हुईं, अमल आज तक नहीं हुआ


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