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सीजेआई बोले- दुष्कर्म पर सख्त कानून का जिम्मा संसद पर छोड़ा था, कुछ नहीं हुआ

दिल्ली में आठ माह की बच्ची से दुष्कर्म का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर घटना माना है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:20 PM IST

दिल्ली में आठ माह की बच्ची से दुष्कर्म का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर घटना माना है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- ‘बच्चियों से दुष्कर्म पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी चिंता जता चुका है। बच्चियों से होने वाले बर्बर और अमानवीय यौन शोषण के खिलाफ सख्त कानून बनाने का काम हमने संसद पर छोड़ा था। अब तक कुछ नहीं हुआ। ऐसे में आज फिर हमें वही बात दोहरानी पड़ रही है।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एम्स के दो डाॅक्टर अस्पताल जाकर पीड़ित बच्ची की जांच करें। उनके साथ विशेष एम्बुलेंस भी जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत एम्स में शिफ्ट किया जा सके। शेष | पेज 13 पर





दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी का सदस्य भी डॉक्टरों के साथ रहेगा। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने बुधवार सुबह चीफ जस्टिस के समक्ष इस केस का उल्लेख किया था। चीफ जस्टिस ने इस पर सुनवाई का निर्णय लेते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को 2 बजे मौजूद रहने को कहा। एएसजी पीएस नरसिम्हन, तुषार मेहता और पिंकी आनंद तय समय पर कोर्ट पहुंच गए। सुनवाई के दौरान अलख आलोक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक केस में आदेश दिया था कि 10 साल तक की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया जाए। अब तक कुछ नहीं हुआ। कोर्ट निर्देश दे कि 12 साल तक की बच्चियों से दुष्कर्म का ट्रायल छह महीने में पूरा कर दोषियों को मौत की सजा दी जाए। बच्ची की जांच रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

कुंठाओं की भेंट नहीं चढ़ने दे सकते

बच्ची के साथ हुए घिनौने अपराध की मानसिक पीड़ा लंबे समय तक रहती है। बच्चों के प्रति अपराध रोकना जरूरी है। यह कठोर दंड के प्रावधानों से ही संभव है। संसद ऐसे अपराधों में कठोर दंड तय करे। -सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता बेंच की टिप्पणी

मप्र सरकार ने फांसी की सजा का कानून मंजूरी के लिए भेजा

भोपाल | 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से ज्यादती पर फांसी की सजा वाले दंड विधि संशोधन विधेयक को मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र को भेज दिया है। इस विधेयक को 4 दिसंबर को मध्यप्रदेश विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।

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