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6 एकड़ जमीन का 30 साल विवाद, सरपंच पति ने 30 मिनट में सुलझाया

आपसी विवाद में कोर्ट कचेहरी और वकीलों के चक्कर में न पड़कर मामले को समझौते से सुलझाना कितना फायदेमंद होता है इसका...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:45 AM IST
आपसी विवाद में कोर्ट कचेहरी और वकीलों के चक्कर में न पड़कर मामले को समझौते से सुलझाना कितना फायदेमंद होता है इसका एक सटीक उदाहरण देवरी कस्बे के रिछावर गांव में है। जहां 6 एकड़ जमीन के लिए देवर और भाभी के बीच करीब 30 साल से चल रहे विवाद में दोनों पक्षों के जमीन की कीमत से भी अधिक रुपए खर्च होने के बाद आखिर में विवाद आपसी समझौते से ही खत्म हुआ।

सरपंच पति की पहल के बाद दोनों पक्षों में राजीनामा हुआ और बाद में उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि पहले ही मामले को आपसी समझौते से निपटा लिया जाता तो मनमुटाव भी नहीं होता और कोर्ट कचेहरी के चक्कर में जो लाखों रुपए बर्बाद हुए वह भी बच जाते।

रिछावर गांव की सरपंच मालतीबाई गोविंद सिंह लोधी ने बताया गांव की ही मीराबाई लोधी व उनके देवर मोहनसिंह लोधी के बीच 6एकड़ जमीन को लेकर 30 साल से विवाद चल रहा था।

मीराबाई के पति लक्ष्मीनारायण की मौत के बाद देवर ने उनकी जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। 30 साल से जमीन देवर के ही पास थी। जो अपनी भाभी को जमीन देने तैयार नहीं था। इस दौरान हाईकोर्ट में भी केस चलता रहा। करीब एक महीने पहले मीराबाई ने देवर को फसल नहीं काटने दी तो दोनों में झगड़ा हो गया। थाने में दोनों पक्षों पर मामला दर्ज किया गया। सालों से केस लड़ रहे दोनों पक्ष पहले ही लाखों रुपए बर्बाद कर चुके थे। झगड़े के बाद फिर तहसील व थाने के चक्कर काटने लगे। थाने में भी दोनों पक्षों से पैसे लिए गए। दोनों पक्षों को इस तरह से बर्बाद होता देख सरपंच पति गोविंदसिंह लोधी ने मीराबाई व देवर मोहनसिंह लोधी के बीच सुलह कराने का निर्णय लिया। उन्होंने देवर को समझाया कि जमीन पर भाभी मीराबाई का हक है और तुम 6 एकड़ जमीन की कीमत से कहीं अधिक राशि वकीलों को दे चुके हो। इतनी राशि में 6 एकड़ से दोगुनी जमीन खरीदी जा सकती थी। तब मोहनसिंह को समझ आया और वह समझौतेे के लिए तैयार हो गया।

मैं 6 साल का था तब से चल रहा था विवाद: गोविंद सिंह

सरपंच पति गोविंदसिंह लोधी ने बताया कि जब मेरी उम्र छह साल की थी तब से यह विवाद चल रहा था। समय बीतता गया, लेकिन विवाद खत्म होने की बजाय और बढ़ता गया। सालों बाद जब विवाद ने फिर से तूल पकड़ा तो मैंने इस विवाद को समाप्त कराने का निर्माण लिया। तहसीलदार से सीमांकन करवाने के लिए चर्चा की तो उन्होंने भी विवाद खत्म करवाने के लिए प्रोत्साहित किया। आखिर में ग्रामीणों के सहयोग से सालों पुराना मामला 30 मिनट में ही आपसी सहमति से ही निपट गया।

बैठक कर दो पक्षों में 30 साल से चल रहा विवाद सुलझाया।

रिश्तेदारों के बीच 30 मिनट में ऐसे हुआ समझौता

मोहनसिंह की सहमति के बाद गांव में पंचायत व ग्रामीणों को एकत्रित किया गया। दोनों पक्षों के लोग एकत्रित हुए और मोहनसिंह के रिश्तेदारों को भी बुलाया गया। देवर ने भाभी की 6 एकड़ जमीन लौटाई और मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपए भी दिए। इस समझौत के बाद दोनों में आपसी मनमुटाव भी कम हो गया और दोनों पक्ष कोर्ट कचेहरी के चक्कर में पड़कर पैसा बर्बाद करने से भी बच गए।