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रुक जाना नहीं योजना से उत्तीर्ण नियमित एवं स्वाध्यायी छात्र-छात्राओं को बताया अपात्र

माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने ऐसे छात्र छात्राओं को वार्षिक परीक्षा में शामिल होने से रोका है जिन छात्र-छात्राओं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 07:40 AM IST

रुक जाना नहीं योजना से उत्तीर्ण नियमित एवं स्वाध्यायी छात्र-छात्राओं को बताया अपात्र
माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने ऐसे छात्र छात्राओं को वार्षिक परीक्षा में शामिल होने से रोका है जिन छात्र-छात्राओं ने वर्ष 2016 में रुक जाना नहीं योजना अंतर्गत हाईस्कूल की परीक्षा उर्त्तीण की। रुक जाना नहीं योजना में उर्त्तीण इन छात्र छात्राओं से माध्यमिक शिक्षा मंडल ने पहले फीस लेकर ऑनलाइन परीक्षा फार्म जमा कराए। बाद में गैरतगंज सहित प्रदेश भर के छात्र-छात्राओं के परीक्षा के अंतिम समय में प्रवेश पत्र रोक दिए। और छात्र छात्राएं परीक्षा से वंचित हो गए। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। छात्र-छात्राओं एवं उनके पालकों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भेजकर उचित न्याय दिलाने की मांग की है।

वर्ष 2016 में मप्र शासन के शिक्षा विभाग द्वारा छात्र-छात्राओं के भविष्य संवारने एवं उनका शैक्षणिक सत्र बरबाद न होने के उद‌्देश्य से वार्षिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए छात्र छात्राओं को रुक जाना नहीं ं योजना चालू की गई। जिसके अंतर्गत छात्र छात्राएं अनुत्तीर्ण हुए विषयों को दोबारा पेपर के माध्यम से उत्तीर्ण कर सकता है। इसी के तहत अनुत्तीर्ण छात्र छात्राओं ने वर्ष 2016 में रुक जाना नहीं योजना के अंतर्गत पेपर देकर कक्षा 10वीं उत्तीर्ण भी की। बाद में 1 वर्ष के अंतराल के बाद 12वीं कक्षा में प्रवेश के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल की बेवसाइट से परीक्षा के लिए आवेदन भरे। उस समय मंडल ने उनके आवेदनों को स्वीकार भी किया। बाद में परीक्षा के एन मौके पर मंडल ने छात्र-छात्राओं के प्रवेश पत्र यह कहकर रोक लिए कि वे 12वीं की परीक्षा के लिए पात्र नही है। गैरतगंज क्षेत्र के छात्र विक्रम दांगी, मनीष सेन, ऋषि गौर, नीता, रूपसिंह, सौरभ सहित दर्जनों छात्र-छात्राओं ने बताया कि मंडल ने पहले परीक्षा फीस ली बाद में कोचिंग सहित अन्य पढ़ाई के माध्यमों में उनको पैसा खर्च करना पड़ा। प्रवेश पत्र नहीं आने से उनको आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक नुकसान भी हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि वे पात्र नहीं थे तो ऑनलाइन परीक्षा फार्म क्यों बोर्ड ने स्वीकार किए। जबकि ऑनलाइन फार्म में उत्तीर्ण का वर्ष, बोर्ड का नाम तथा मार्कशीट स्केन करके मांगी गई। फिर क्यों आखिर में उन्हें अपात्र घोषित कर दिया।

बोर्ड ने की बड़ी मात्रा में फीस वसूली

इस मामले में माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा प्रदेश भर के हजारों छात्र छात्राओं को उठाना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश भर के लगभग 15 हजार छात्र-छात्राओं को वार्षिक परीक्षा से वंचित होना पड़ा है। वहीं प्रति छात्र लगभग 1 हजार रुपए का परीक्षा शुल्क लेकर माध्यमिक शिक्षा मंडल ने करोड़ों की फीस छात्र-छात्राओं से ले ली। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा किए गए छात्र छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ एवं फीस के नाम पर बड़ी मात्रा में वसूली की गई है। वही शासन द्वारा छात्र-छात्राओं के हित में लागू की गई इस योजना में माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारियों द्वारा पलीता लगाया गया। छात्र-छात्राओं ने एक ज्ञापन तहसीलदार सुनील प्रभास के माध्यम से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आवेदन भेजकर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं इस मामले में मंडल के खिलाफ कोर्ट में मामला ले जाने की बात भी छात्र-छात्राओं के पालकों ने की।

रूक जाना नहीं से परीक्षा पास करने वाले छात्रों को किया परीक्षा से वंचित।

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Web Title: रुक जाना नहीं योजना से उत्तीर्ण नियमित एवं स्वाध्यायी छात्र-छात्राओं को बताया अपात्र
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