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धर्म.... अहंकारी अंधे के समान होता है: कुंथुसागर

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:35 PM IST

गैरतगंज| आंखें होते हुए भी अहंकारी अंधे के समान होता है। उसे कुछ दिखाई नहीं देता। वह अहंकार के मद में कुछ भी करता...
गैरतगंज| आंखें होते हुए भी अहंकारी अंधे के समान होता है। उसे कुछ दिखाई नहीं देता। वह अहंकार के मद में कुछ भी करता चला जाता है। अहंकार के चलते ही उसे जीवन में कई दुष्परिणाम भोगना पड़ते हैं। यह बात गैरतगंज में विराजमान जैन मुनि कुंथुसागर महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। प्रवचन देते हुए जैन मुनि कुंथुसागर महाराज ने मानव जीवन में अहंकार के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन की मूलभूत समस्या अहंकार है और समर्पण उसका मूल समाधान है। मैं हूं . मैं भी कुछ हूं यह जो भाव है यही अहंकार है। मुनि श्री ने मनुष्य को अहंकार को तत्काल छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि अहंकार अर्थात घमंड के कारण ही व्यक्ति को पग पग पर परेशानी उठाना पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि भ्रम को त्याग कर मनुष्य वास्तविक जीवन को जिए तथा प्रभु का ध्यान करे इसी में उसका कल्याण है। अहंकार की आंखें नहीं होती वह अंधा होता है। वह चल तो सकता है पर देख नहीं सकता। इसी तरह अहंकारियों की स्थिति अंधे जैसी ही होती है। आंखें होते हुए भी वह अंधे के समान होता है। जैन मुनि ने कहा कि अहंकार से बचने का हर संभव प्रयास करो क्योंकि अहंकार आत्मा और परमात्मा के बीच दीवार का काम करता है। जैन मुनि के प्रवचन प्रतिदिन मंदिर में हो रहे हैं जिन्हें सुनने बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

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Web Title: धर्म.... अहंकारी अंधे के समान होता है: कुंथुसागर
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