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सारा संसार दुख और समस्याओं से भरा है: पं. राजेश

शरीर में भक्ति की कमी से सारा दुख लगता है। सारा संसार समस्याओं से भरा पड़ा है। क्या मीरा, प्रहलाद, ध्रुव, सुदामा को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:40 AM IST

सारा संसार दुख और समस्याओं से भरा है: पं. राजेश
शरीर में भक्ति की कमी से सारा दुख लगता है। सारा संसार समस्याओं से भरा पड़ा है। क्या मीरा, प्रहलाद, ध्रुव, सुदामा को कोई दुख नहीं था। हम सब पर माया का पर्दा पड़ा है। परंतु जिस समय भक्ति हमारे हृदय मे निवास कर लेगी फिर माया का प्रभाव अपने आप कम होने लगेगा।

यह बातें गांव कजलास के शीतला माता धाम में चल रही भागवत कथा के छठवें दिन कथा वाचक पं. राजेश शर्मा ने कहीं। उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल हरिनाम संकिर्तन से भक्ति बढ़ेगी। क्योंकि हमारा जीवन क्षण भंगुर है। जब चीरहरण हो रहा था तब चीर बढ़ाया। प्रहलाद के लिए खंबे में आए,सुदामा को धनवान बनाया। भगवान आते हैं जब कोई उन्हें सच्चे मन से पुकारते हैं।

हमारी संस्कृति लगातार बिगड़ रही है। पाश्चात्य संस्कृति हावी हो रही है। आजकल घरों के द्वार पर वेलकम लिखा जाता है। हमें द्वार परस्वास्तिक, ओम,कलश बनाने चाहिए।

भगवान की शरण के अतिरिक्त कुछ आवश्यक नहीं: गोवर्धन पर्वत का महत्व भी बताया। गोकुल में सभी लोग इंद्र की पूजा में लीन थे तब श्रीकृष्ण ने कहा बाबा हम इंद्र की पूजा क्यों करते हंै। तब बाबा ने कहा इंद्र हमारे लिए वर्षा करते हैं इसलिए हम उनको पूजते हैं। भगवान ने कहा हमें तो इंद्र की जगह गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। हम सब का भरण-पोषण गोवर्धन पर्वत करते हंै। तभी इंद्र क्रोधित होकर भयंकर वर्षा करते हंै। चारों ओर भगदड़ मच जाती है। तभी सभी कृष्ण की शरण में आए। भगवान ने कहा चलो सब गोवर्धन की शरण में चलते हैं। भगवान ने अपनी शक्ति से पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया और बताया कि जो मेरी शरण में आता है उसे दूसरे की जरूरत नहीं रहती।

धर्म

कजलास गांव के शीतला माता धाम में चल रही भागवत कथा में बताया हरिनाम संकीर्तन का महत्व

भागवत कथा में हुआ श्रीकृष्णा रूखमणी विवाह।

श्रीकृष्ण रूकमणी का हुआ विवाह, महाप्रसादी बांटी

भागवत कथा में आगे श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह के प्रसंग पर पंडित जी ने कहाकि रूखमणी का भाई रूख्म अपनी बहन का विवाह शिशुपाल के साथ करना चाहता था परंतु रूकमणी जी श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती थी। रूखमणी जी ने एक पत्रिका पंडित के हाथ द्वारिका पुरी भेजी। पत्रिका मे लिखा प्रभु सायं काल से पहले पधारो और मेरे प्राणों की रक्षा करों। भयंकर युद्ध हुआ अंत में भगवान ने रूखमणी से विवाह किया। कथा पांडाल भगवान की जय कारो से गुंजने लगा। समिति ने महाप्रसादी का भक्तों में वितरण किया गया।

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