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भास्कर संवादददाता | जीरापुर

भास्कर संवादददाता | जीरापुर शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल में एक दशक से बनी हुई भवन की समस्या मौजूदा सत्र की...

Danik Bhaskar

Mar 02, 2018, 03:40 AM IST
भास्कर संवादददाता | जीरापुर

शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल में एक दशक से बनी हुई भवन की समस्या मौजूदा सत्र की समाप्ति तक यथावत बनी हुई है। स्कूल के एक एक कक्ष में सौ से सवा सौ छात्राएं बैठकर अध्ययन करती हैं। एक और प्रदेश सरकार बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नित नई योजना लाकर बेटियों को शिक्षा के प्रति आकर्षित कर रही हैं, लेकिन स्कूलों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं है। कहीं स्टाफ की कमी, तो कहीं कक्षों की कमी से छात्राएं जूझ रहीं हैं।

स्कूल में कमरों की कमी से आ रही परेशानी से विभाग के अधिकारियों सहित प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी भली भांति परिचित हैं। कई वर्षों से छात्राएं इस समस्या जूझ रही हैं। इस सत्र में स्कूल में तीन दर्जन गांवों की 970 बालिकाएं कक्षा 9 से 12 तक अध्ययन कर रही हैं। जिनके बैठने व पढ़ने के लिए मात्र 10 कमरे ही उपलब्ध हैं। एेसे में कक्षा 9 व 10 की बालिकाओं को तो एक-एक कक्ष में 100 से 125 बालिकाओं बैठाया जाता है। एसी एेसी विषम परिस्थितियों में बालक-बालिकाएं न तो ठीक से बैठ पाती हैं और न ही पढ़ पाती हैं। एेसी स्थित में स्कूल का वार्षिक परीक्षा परिणाम भी प्रभावित होता है। स्कूल की ज्यादातर छात्राओं को अपनी पढ़ाई के लिए कोचिंग सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। स्कूल में पढ़ने वाली 80 प्रतिशत बालिकाएं ग्रामीण क्षेत्रों की हैं, वहीं सरकारी स्कूल में गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों की बेटी ज्यादातर अध्ययन करने जाती है।

अधिकारी भी जानते हैं स्कूल की समस्या

कन्या शाला स्कूल में साल भर कई शासकीय आयोजन प्रमुखता से होते हैं। जिसमें हर बार जनप्रतिनिधि व अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अमला शामिल होता है। इस दौरान स्कूल की छात्राओं से लेकर स्कूल स्टाफ द्वारा कमरों की कमी की ओर ध्यान दिलाया जाता है, लेकिन अधिकारी व जनप्रतिनिधि आश्वासन देकर चलते बनते हैं, फिर उधर पलटकर भी नहीं देखते हैं। पिछले दिनों संवेदना संवाद कार्यक्रम में भी अधिकारियों ने आश्वासन दिया था, लेकिन अमल नहीं हुआ।

सौ साल पुराने भवन का आधा हिस्सा ही बन सका

कन्या शाला जिस स्थान पर लगती है वह भवन होल्कर स्टेट के दौरान घुड़साला थी। जहां पहले बालक मिडिल स्कूल लगता था, जिसे बाद में कन्या हासे स्कूल को दे दिया। स्कूल के एक हिस्से में करीब 11 कमरों का निर्माण कराया गया है, जबकि स्कूल दो हिस्सों का निर्माण होना बाकी है। यदि स्कूल के शेष हिस्से को गिराकर भवन का निर्माण कराया जाता है, तो स्कूल की सारी समस्या का समाधान हो सकता है। अब स्कूल का परिसर भी छोटा पड़ने लगा है।

कई स्थानों पर कम संख्या भवन ज्यादा

ब्लाक के गांव में कई सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या तो कम है, परंतु भवन पर्याप्त या आवश्यकता से अधिक हैं। विभागीय अधिकारी व नेता गांवों में भवनों की मंजूरी पर जोर दे रहे है, मगर नगर की इस बड़ी समस्या के प्रति सभी अनभिज्ञ बने हुए हैं। जिसका खामियाजा बालिकाओं को परेशानी के रूप में उठाना पड़ रहा है।

सत्र समाप्ति तक नहीं ली सुध

स्कूल की इस गंभीर समस्या के प्रति वरिष्ठ अधिकारी गंभीर नहीं हैं। आश्वासन व इंतजार में पूरा सत्र निकल गया। जबकि स्कूल कई कार्यक्रमों में जिला कलेक्टर, डीईओ, सांसद, विधायक से लेकर आला अधिकारी शामिल होते हैं। जिन्हें समस्या के प्रति लिखित व मौखिक बताने पर भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

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