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पांच साल में भी जल आवर्धन योजना को चालू नहीं

पांच साल में भी जल आवर्धन योजना को चालू नहीं कर पाई नगर परिषद, परेशान हो रहे नागरिक भास्कर संवाददाता | खिलचीपुर ...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 03:55 AM IST
पांच साल में भी जल आवर्धन योजना को चालू नहीं कर पाई नगर परिषद, परेशान हो रहे नागरिक

भास्कर संवाददाता | खिलचीपुर

गर्मी की शुरूआत के साथ ही नगर में जल संकट ने पैर पसार लिए हैं। वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या के प्रति जनप्रतिनिधियों सहित प्रशासन समस्या का हल नहीं कर पाया है। नागरिकों को इस विकट समस्या का निदान करने में कोई रुची नहीं है। इसके चलते अधिकांश वार्डों के लोग पानी के स्रोतों की तलाश में भटक रहे हैं। गर्मी शुरू होते ही अधिकांश स्थानों के पेयजल स्रोत समय से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। जिससे रहवासियों की मुसीबतें और अधिक बढ़ रही हैं। वहीं नगर परिषद भी पर्याप्त और शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं करा पा रही है। इस कारण लोग इधर-उधर पानी की जुगत में भटकते नजर आ रहे हैं। इसमें अधिक समस्या वार्ड नंबर चार व पांच के रहवासियों को उठाना पड़ रही है। मार्च माह से ही पानी के लिए दो से तीन किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है।

पांच साल में चालू नहीं हुई योजना

शासन द्वारा करोड़ों रुपए की मुख्यमंत्री जल आवर्धन योजना स्वीकृत की गई थी। जिस पर तीन साल से काम चल रहा है, लेकिन उसका काम पूरा नहीं किया जा सका है।

अब तक बगा फत्तूखेड़ी से बैराज से नगर में पाइप लाइन लाई गई है, लेकिन उसे चालू नहीं किया गया है। इस कारण जान जोखिम में डालकर बालक-बालिकाओं सहित लोग नेशनल हाईवे को पार कर पानी लाते हैं। जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

दो-तीन किमी दूर से पानी ला रहे लोग : नगर में नागरिकों के लिए पानी के स्रोत भी नहीं हैं। हैंडपंप और ट्यूबवेल हैं, वह भी दम तोड़ रहे हैं। गर्मी अपने शबाब पर आने से पहले ही हिचकोले मारने लगे हैं। इससे लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। लोग कुएं-बावड़ियों पर निर्भर हैं, लेकिन इनमें भी पानी सूखने की कगार पर है। ऐसे में लोग निजी जल स्रोत ट्यूबवेलों के भरोसे हैं। तालाब स्थित जल कुएं, छोटे महाराज स्थित कुएं और क्षीर सागर का कुएं। इन तीनों कुओं से लोग पानी की जुटा रहे हैं। इसके अलावा फलौदी लॉज की ट्यूबवेल व कुएं, तोपखाना गेट पर राजा बोहरा की ट्यूबवेल से नागरिक पानी की जुगत कर रहे हैं। यहां से पानी भरने के लिए एक से तीन किमी की दूरी तय करना पड़ती है। लेकिन प्रशासन द्वारा कोई सार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।