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News - मुंगावली-कोलारस जीतकर कांग्रेस ने अपनी सीटें बचाईं बहरहाल, शिवराज सरकार के इस कार्यकाल में हुए 14 उपचुनावों में...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:00 AM IST
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मुंगावली-कोलारस जीतकर कांग्रेस ने अपनी सीटें बचाईं

बहरहाल, शिवराज सरकार के इस कार्यकाल में हुए 14 उपचुनावों में यह पहली बार नहीं है कि चुनाव में दोनों दलों ने इतनी ताकत नहीं झोंकी गई, लेकिन इस बार का उपचुनाव अहम इसलिए है, क्योंकि ठीक आठ महीने बाद विधानसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में ये नतीजे कांग्रेस को नई ऊर्जा देने के साथ ही भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल की संभावनाओं को न केवल मजबूत करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि भाजपा विधानसभा चुनाव लड़ने की रणनीति में क्या बदलाव करेगी? इसकी वजह यह भी है कि लगातार 14 साल की भाजपा सरकार के विकास से जुड़े मुद्दे, हर चुनावों में हो रही एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की घोषणाएं, स्मार्ट सिटी बनाने के वादे और इस बार तो शिवराज सरकार ने आदिवासी सहरिया समुदाय को साधने के लिए एक हजार रुपए उनके खाते में देने की शुरुआत भी कर दी, इन सबके बावजूद यदि भाजपा के खाते में शिकस्त है तो यह परोक्ष रूप से एंटी इनकंबेंसी की ओर संकेत हैं। भाजपा के पास अब कोई चुनावी पैंतरा भी नहीं होगा क्योंकि केंद्र और राज्य में उनकी ही सरकार है।

ऐसा भी पहली बार हुआ : ऐसा पहली बार हुआ है जब मुख्यमंत्री किसी चुनाव में प्रचार के बाद वापस भोपाल लौटने के बजाय वहीं रुके। ऐसा उन्होंने आठ बार किया। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1500 करोड़ की सरकारी घोषणाएं हुई। इसी तरह सांसद सिंधिया ने पूरे चुनाव के दौरान 13 दिन-रात यहां ठहरे रहे। कांग्रेस की तरफ से स्टार प्रचारक के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन को छोड़कर सभी प्रदेश के ही नेता रहे। जबकि भाजपा उम्मीदवार को जिताने के लिए शिवराज कैबिनेट के 23 मंत्रियों ने अपनी ताकत झोंकी।

कैडर बेस पार्टी कहीं मास बेस तो नहीं बन गई : आमतौर पर भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ से लेकर पेज प्रमुख तक जमावट होती है। इस बार भाजपा ने दस बूथ पर एक बाहरी व्यक्ति भी तैनात किया, इसके बावजूद वह हार गई। साफ है कि भाजपा का अपना कार्यकर्ता कहीं न कहीं सत्ता या संगठन से नाराज है। यह भाजपा के लिए मंथन का विषय होगा।

कार्तिक हारे पहली चुनावी पारी : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान अपनी पहली चुनावी पारी हार गए हैं। कोलारस विधानसभा उपचुनाव में वो किरार समाज का सम्मेलन संबोधित करने गए थे। माना जा रहा था कि शिवराज सिंह चौहान के युवराज को अपने बीच पाकर किरार- धाकड़ समाज भाजपा के पक्ष में थोकबंद वोट करेगा परंतु ऐसा नहीं हुआ। कोलारस में किरार बेल्ट से कांग्रेस 3706 को वोट प्राप्त हुए हैं और भाजपा को वोट 3439 मिले है। इस तरह से कांग्रेस 267 वोटों से आगे रही।

बचाव में भाजपा की दलीलें और उनके मायने : 1. मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा-2013 में भाजपा की लहर के बाद भी 20 से 25 हजार से हारे। इस बार तो यह अंतर काफी कम है। हमारा तो वोट शेयर बढ़ा।

मतलब : अभी कोई लहर नहीं। वह भी तब, जब मुख्यमंत्री 6 बार रात्रि में रुके।

2. सीएम और नंदकुमार ने कहा- बसपा नहीं थी, जिसका लाभ कांग्रेस को मिला।

मतलब - पिछली बार बसपा के रहते भाजपा बुरी तरह हारी थी। इसलिए यह तर्क खारिज हो जाता है।

लंदन से लौटते ही एयरपोर्ट पर कार्ति चिदंबरम गिरफ्तार

जांच एजेंसी का दावा है कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे। देर शाम दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें एक दिन के रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया। इससे पहले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सुमीत आनंद ने कार्ति को 10 मिनट तक अपने वकील से बात करने की इजाजत भी दी थी। इस गिरफ्तारी पर राजनीति भी गर्मा गई है। कांग्रेस और कार्ति ने इसे बदले की भावना से प्रेरित करार दिया है। वहीं, केंद्र सरकार ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर सीबीआई ने दर्ज किया था केस: सीबीआई ने पिछले साल 15 मई को कार्ति के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, भ्रष्ट और अवैध काम के लिए धन लेने के आरोपों में केस दर्ज किया था। सीबीआई के अनुसार आईएनएक्स मीडिया के रिकॉर्ड में उल्लेख है कि उसने एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्रा. लि. को एफआईपीबी नोटिफिकेशन के लिए 10 लाख रुपए दिए थे। यह कंपनी परोक्ष रूप से कार्ति से जुड़ी है। कार्ति से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़ी कंपनियों और आईएनएक्स के बीच 3.5 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ था। एफआईआर में कार्ति, उनकी कंपनी चेस मैनेजमेंट सर्विसेज, पीटर और इंद्राणी मुखर्जी, आईएनएक्स मीडिया, एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंसल्टिंग सर्विसेज और इसके डायरेक्टर पद्म विश्वनाथन का नाम है। यह केस सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर दर्ज किया गया था।

लुकआउट नोटिस भी जारी हुआ था, कोर्ट की इजाजत से गए थे लंदन : कार्ति पर एक आरोप यह भी है कि टैक्स से जुड़ी जांच रफा-दफा करवाने के बदले उन्होंने आईएनएक्स मीडिया से पैसे लिए थे। तब कंपनी के मालिक इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी थे। अब यह दोनों शीना बोरा हत्याकांड में जेल में हैं। सीबीआई एयरसेल-मैक्सिस डील की एफआईपीबी क्लीयरेंस की भी जांच कर रही है।

होली पर डाक टिकट जारी...

इसके बाद 5 नवंबर 2012 को और फिर बीते साल दो-दो डाक टिकट जारी किए गए। यहां भी गुयाना हमसे आगे रहा। गुयाना ने 1976 में ही दीपावली पर चार डाक टिकट जारी कर दिए थे, जिसमें महालक्ष्मी और दीपदान का चित्र बना है।

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