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प्रेम, संस्कार से बड़ी समस्याओं का हल किया जा सकता है: संध्या तिवारी

रेहटी | दुनिया में प्रेम से बड़ा कोई शस्त्र नहीं है। प्रेम अचूक शस्त्र है। भरत जी ने भगवान श्रीराम को वनवास से वापस...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:05 AM IST
रेहटी | दुनिया में प्रेम से बड़ा कोई शस्त्र नहीं है। प्रेम अचूक शस्त्र है। भरत जी ने भगवान श्रीराम को वनवास से वापस लाने के लिए वहीं अचूक अस्त्र चलाया था, लेकिन प्रेम भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को अपनी मर्यादा और कर्तव्य निभाने से नहीं रोक पाया और भरत को अयोध्या का प्रभार सौंपकर समझा बुझाकर वापस भेज दिया। भरत और श्रीराम जैसा प्रेम प्रत्येक व्यक्ति होना चाहिए। उक्त बातें मारुति नंदन धाम इटावा सरकार में चल रही श्रीराम कथा में कथा वाचक संध्या तिवारी ने कहीं। उन्होंने रामकथा को लेकर अटूट प्रेम की कई कथाओं का वर्णन विस्तार से किया। दुनिया में सबसे अधिक प्रेम और प्यार की आवश्यकता है। इसी से बड़े से बड़े विवाद समाप्त किए जा सकते हैं। दुनिया में अमन और शांति पैदा की जा सकती है। हम संस्कृति, प्रेम और संस्कार को भूलकर भोग विलासिता की वस्तुओं में रम गए हैं। इसी के कारण दुनिया में पतन, आतंकवाद, अलगाववाद जैसी विराट समस्याएं व्याप्त हो गई हैं। बड़े-बड़े देश और विशेषज्ञ भी इन समस्याओं का हल नहीं खोज पा रहे हैं। यह चिंता का विषय है। सनातन हिंदू धर्म के ग्रंथों में इन सारी समस्याओं का हल है, लेकिन कोई अमल करने को तैयार नहीं। धर्म को जाति, समुदाय में बांट दिया है। जो कि दुनिया में एकता के लिए घातक है। आवश्यकता समझने और समझाने की है। कथा सुनने आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच रहे हैं।

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