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परंपरा निभाने 13 स्थानों पर रोकी मां बीजासन भैंसवा माता की सालाना पालकी

भास्कर संवाददाता| सुठालिया/सुलतानिया जिले की सिद्धपीठ मां बीजासन भैंसवा माता की सालाना पालकी यात्रा में लाखों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:10 AM IST

भास्कर संवाददाता| सुठालिया/सुलतानिया

जिले की सिद्धपीठ मां बीजासन भैंसवा माता की सालाना पालकी यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। पूर्णिमा की रात निकाली पालकी यात्रा में शामिल किन्नरों ने बधाई गीत गाए। दूरदराज से आए मां के भक्तों व ग्रामीणों ने पालकी उठाई। यह आयोजन देर रात तक जारी रहा।

पालकी की शुरुआत पूर्णिमा की रात आठ बजे हुई। विशेष नगाड़े व ढोलों की थाप और मशाल की रोशनी में नृत्य कर रहे भक्तों के साथ यह पालकी गांव के पुराने माता मंदिर पहुंची। वहां से वापस यात्रा आधी रात के बाद पहाड़ी स्थित मंदिर आई। श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट व प्रशासन पानी, रोशनी, सुविधा घर सहित दूसरी व्यवस्थाएं नहीं जुटा पाया। इससे लोग परेशान हुए। पूजन के बाद पालकी को विधायक कुंवर सिंह कोठार व उपेंद्र छावरी आदि ने कंधा दिया। इससे पहले दिन में एसपी सिमाला प्रसाद सहित अन्य अधिकारियों ने माता के दर्शन किए।

आकर्षक आतिशबाजी व ढोलों ने मनमोहा : यात्रा के दौरान विशेष ढोलों व नगाड़ों के जरिए पारंपरिक धुनें बजाई गईं। आकर्षण आतिशबाजी भी की गई। पालकी यात्रा गांव के मंदिर पहुंची। यहां पूजन के बाद यात्रा वापस पहाड़ी स्थित माता मंदिर के लिए रवाना हुई।

वार्षिक आयोजन के दौरान निकाली मां बीजासन की पालकी में शामिल हुए लाखों श्रद्धालु

अपने कंधों पर मां बीजासन की पालकी ले जाते श्रद्धालु।

मशालों की रोशनी में निकाली पालकी, 13 जगह रोकी

दशकों पुरानी परंपरा के अनुसार पहाड़ी मंदिर से यह यात्रा रात के अंधेरे में गांव के लिए रवाना हुई। हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने से यह जुलूस डेढ़ किमी लंबा हो गया था। मशालों के साथ निकली यात्रा के दौरान पालकी पुरानी रीति के मुताबिक 13 स्थानों पर रोकी। मशालों की रोशनी में किन्नरों का नृत्य देखते ही बनता था।

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