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स्वास्थ्य आयुक्त के निर्देश के बाद भी फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं, कर रहे इलाज

News - नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बिना डिग्री के मरीजों का उपचार करने वाले फर्जी डॉक्टरों की संख्या लगातार बढ़ती जा...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 05:40 AM IST
स्वास्थ्य आयुक्त के निर्देश के बाद भी फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं, कर रहे इलाज
नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बिना डिग्री के मरीजों का उपचार करने वाले फर्जी डॉक्टरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में यह फर्जी डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते।

ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासी न तो फर्जी डॉक्टरों की डिग्री का ध्यान देते और न ही दवाओं का। कम पैसों के चक्कर में इलाज करा लेते हैं। परंतु प्रशासन द्वारा आज तक इन झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पूर्व में छुटपुट कार्रवाई कर इतिश्री कर ली गई थी। विगत दिवस फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य आयुक्त ने समस्त कलेक्टर और एसपी को निर्देश भी जारी किए थे। परंतु प्रभावी कार्रवाई आज तक नहीं की गई। स्वास्थ्य आयुक्त ने प्रदेश के सभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर अनधिकृत रुप से चिकित्सा व्यवसाय कर रहे बिना डिग्री के डाक्टरों तथा दूसरे राज्य से पंजीकृत चिकित्सकों के विरुद्ध गंभीरतापूर्वक कार्रवाई करने के दिशा निर्देश दिए थे।

केवल यह लोग लिख सकते हैं डॉक्टर: मप्र चिकित्सा शिक्षा संस्था अधिनियम 1973 और संशोधित 2006 की धारा 7(ग) के अनुसार डॉक्टर केवल वही व्यक्ति लिख सकता है जो मप्र मेडिकल काउंसिल मप्र होम्योपैथी काउंसिल मप्र आयुर्वेदिक एंड यूनानी बोर्ड भोपाल तथा मप्र डेंटल काउंसलिंग इंदौर से चिकित्सा व्यवसाय के रूप में रजिस्ट्रीकृत हों। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति स्वयं को चिकित्सा व्यवसाय के रूप में अभिव्यक्त करने के लिए अपने नाम के आगे डॉक्टर का उपयोग करता है तो वह अधिनियम की धारा 8, (2) के अंतर्गत 3 वर्ष तक के कारावास या 50 हजार तक के अर्थदंड अथवा दोनों से दंडनीय हो सकता है।

ग्रामीण क्षेत्र में सबसे ज्यादा फर्जी डॉक्टर, जो मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड़

जन स्वास्थ्य रक्षक भी नहीं कर सकते चिकित्सा व्यवसाय

विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ रहे जन स्वास्थ्य रक्षक भी मप्र आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 के अंतर्गत एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से चिकित्सा व्यवसाय करने की पात्रता नहीं रखते अगर यह चिकित्सा व्यवसाय करते हैं तो वह असंवैधानिक है।

सूची बनाकर करेंगे कार्रवाई


केवल तीन दवाखाने पंजीकृत

सभी काउंसिलों में पंजीकृत चिकित्सकों को अपनी क्लीनिकों का पंजीयन जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में पंजीयन कराकर लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इस अधिनियम के अंतर्गत पूरे उदयपुरा तहसील में केवल तीन क्लीनिक ही मान्यता प्राप्त लाइसेंस वाले हैंं। इनमें डॉक्टर विजय कुमार मालाणी का मालाणी क्लीनिक, डॉक्टर राजेश चौकसे का कांता देवी पॉलीक्लिनिक ब्रह्मा नगर तथा डॉक्टर आरएन सिंह का मारुति क्लीनिक ही लाइसेंस प्राप्त हैं शेष अनधिकृत रुप से चल रहे हैं।

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