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स्वच्छ सर्वेक्षण: ओडीएफ में पास, अब सबसे बड़ी चुनौती- कचरे का सही मैनेजमेंट

क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) ने भोपाल को ओडीएफ की परीक्षा में पास कर दिया है।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 02, 2018, 04:53 AM IST

  • स्वच्छ सर्वेक्षण: ओडीएफ में पास, अब सबसे बड़ी चुनौती- कचरे का सही मैनेजमेंट

    भोपाल .क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) ने भोपाल को ओडीएफ की परीक्षा में पास कर दिया है। अब राजधानी के लिए अगली चुनौती स्वच्छ सर्वेक्षण है। शहर भर में यहां- वहां फैला कचरा नगर निगम के लिए परेशानी का सबब बन गया है। महापौर आलोक शर्मा और आयुक्त प्रियंका दास के साथ चारों अपर आयुक्त व अन्य वरिष्ठ अफसर सुबह से सफाई व्यवस्था का मुआयना कर रहे हैं। इसके बावजूद शहर में करीब 100 स्पॉट ऐसे हैं जहां कचरे के बड़े ढेर लगे रहते हैं।

    - इन स्पॉट पर से कचरा हटाना और पूरे शहर से इकट्ठा होने वाले कचरे को सोर्स पर ही सेग्रीगेट करना किसी चुनौती से कम नहीं है। अपर आयुक्त एमपी सिंह के अनुसार क्यूसीआई ने उन्हें रिपोर्ट पॉजिटिव होने की सूचना दी है, लेकिन ओडीएफ के रिसर्टटिफिकेशन का प्रमाण पत्र मंगलवार को आएगा।ओडीएफ के रिसर्टिफिकेशन पर स्वच्छ सर्वे में 145 नंबर मिलेंगे। पिछली बार यह 150 अंक थे।


    पिछले सर्वे में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में था येलो मार्क

    - 2017 में हुए सर्वे में भोपाल ने देश में दूसरा स्थान पाया था, लेकिन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में येलो मार्क था, जबकि अन्य सभी श्रेणियों में ग्रीन था। उस समय भानपुर खंती में कचरा डाला जा रहा था, लेकिन निगम ने एस्सेल इंफ्रा के साथ हुए अनुबंध के आधार पर दावा किया था कि काम शुरू हो गया है।

    खामी

    घर- घर से कचरा कलेक्शन में...

    -निगम के रिकाॅर्ड के अनुसार 85 वार्डों में घर- घर से कचरा कलेक्शन हो रहा है। हकीकत यह है कि ज्यादातर काॅलोनियों में हफ्ते में दो से तीन दिन ही घर-घर से कचरा उठ रहा है। कचरा कलेक्शन के लिए कर्मचारियों को दी गईं साइकिलें टूटी हैं। ऐसे में 20 से अधिक वार्डों में मैजिक गाड़ी से कलेक्शन हो रहा है। कॉलोनी में मैजिक एक कोने में खड़ी हो जाती हैं और कामगार घरों से थैलियों में कचरा लेकर आता है।

    बड़ी समस्या

    सोर्स पर सेग्रीगेशन...

    -स्वच्छ सर्वे में इस बार सोर्स पर ही कचरे का सेग्रीगेशन करने पर जोर है। यानी जिस जगह पर कचरा पैदा हो रहा है वहीं, गीले और सूखे कचरे को अलग किया जाना है। गीले कचरे का उपयोग कंपोस्ट या अन्य उत्पाद बनाने में उपयोग करना है। सर्वे में दिखाने के लिए मैजिक गाडिय़ों, साइकिलों और शहर भर में लगी डस्ट बिन पर सूखा कचरा और गीला कचरा लिखा गया है, लेकिन हकीकत में यह मिक्स ही हो रहा है।

    असली चुनौती

    - यहां-वहां लगे ढेर -एयरपोर्ट मेन रोड, सिंगारचोली, टीबी हाॅस्पिटल, कैंसर हाॅस्पिटल, नारियलखेड़ा, एमएलए क्वार्टर्स, कोलार तिराहे के पीछे, सर्वधर्म ए सेक्टर, आराधना नगर, दशहरा मैदान टीटी नगर, 74 बंगला में अंदर, अरेरा हिल्स, सीआई कॉलोनी, एमपी नगर रचना नगर अंडरब्रिज के पास, बिजली नगर कॉलोनी के पीछे, पारूल अस्पताल के पास, बाबा नगर, बांसखेड़ी, शाहपुरा सी सेक्टर नई सड़क, वल्लभ भवन के सामने समेत अन्य स्थान।

    - इस बार सर्वे में कचरा सेग्रीगेशन को जोड़ा गया है। सोर्स पर कचरा सेग्रीगेशन के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है। शहर में जितने भी कचरे के प्वाइंट्स हैं उनको चिह्नित कर लिया गया है। अगले कुछ दिनों में इन्हें हम क्लीन कर लेंगे।
    - एमपी सिंह, अपर आयुक्त, नगर निगम

    प्रचार ताे हो रहा लेकिन इस तरह का अतिक्रमण भी चुनौती

    दिसंबर में जागा नगर निगम
    - इस बार स्वच्छ सर्वे की तैयारियां देरी से शुरू हुई। दिसंबर में महापौर आलोक शर्मा ने जांच शुरू की। अफसरों को मैदान में तैनात किया गया। टाइम लिमिट की बैठक में निगमायुक्त सफाई व्यवस्था की समीक्षा कर रहीं हैं। इतने दबाव के बाद अफसरों ने निरीक्षण शुरू किया है।

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