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अब मप्र पर दबाव, इंदिरा सागर का पानी छोड़ो, दोनों जगह सूखी नर्मदा

जलकपट के कारण गुजरात में सरदार सरोवर बांध खाली हो गया है। मुख्य जलाशय में जलस्तर महज 112.22 मीटर रह गया है।

Danik Bhaskar | Feb 09, 2018, 06:02 AM IST

भोपाल/बड़वानी. जलकपट के कारण गुजरात में सरदार सरोवर बांध खाली हो गया है। मुख्य जलाशय में जलस्तर महज 112.22 मीटर रह गया है। जबकि इसका न्यूनतम जलस्तर 110.7 मीटर रहना अनिवार्य है। गुजरात सरकार की ओर से अब मप्र सरकार पर इंदिरा सागर और आेंकारेश्वर बांध से पानी छोड़ने का दबाव है। इंदिरा सागर से रोजाना 14 मिलियन घन मीटर पानी छोड़ा जा रहा है। हालात अब ये हो गए हैं कि गुजरात के साथ-साथ मप्र में भी नर्मदा सूखने लगी है। जबकि बारिश के मौसम के लिए अभी चार माह बाकी है। इंदिरा सागर में उपयोग के लिए पांच मीटर पानी शेष...

- इंदिरा सागर बांध का जलस्तर फिलहाल 252 मीटर है। सामान्य स्थिति में इसे 247 मीटर से कम नहीं किया जाता। यानी यहां उपयोग में लाने के लिए 5 मीटर पानी शेष है।

- बांध में इतना कम पानी इससे पहले कभी नहीं रहा। पानी कम होने से इस बार मछली उत्पादन आधा रह गया है।

- पुनासा उद्वहन सिंचाई योजना से हर साल किसानों को 5 बार पानी दिया जाता था। इस बार तीन बार से ज्यादा नहीं मिलेगा।

दो मीटर पानी शेष : सीएम रूपाणी की अपील- खरीफ फसल न ले किसान
- अहमदाबाद में सितंबर-2017 में जब मानसून थमा तो नर्मदा बांध का जलस्तर 130.74 मीटर था।

- उपरी क्षेत्र से पानी की आवक भी अच्छी थी। दिसंबर तक जलस्तर 124 मीटर था, जबकि आवक कम थी।

- इसके बावजूद सरकार ने चुनाव के समय दो महीने में 12 मीटर पानी छोड़ दिया। बांध में न्यूनतम जलस्तर 110.7 मीटर रहना अनिवार्य है। यानी बांध में उपयोग के लिए सिर्फ 2 मीटर पानी शेष है।

- सीएम विजय रूपाणी अब किसानों से अपील कर रहे हैं कि इस बार खरीफ फसल न लें। इस बांध में अधिकतम 138 मीटर की ऊंचाई तक पानी भरा जा सकता है।

जितनी जरूरत उन्हें है, उतनी मप्र को भी

गुजरात से नर्मदा का पानी छोड़ने का प्रेशर है?
- समझौते के तहत ही पानी दे रहे हैं।
नर्मदा पर बने बांधों का जल स्तर घट रहा है।
बारिश कम होने के बाद भी किसानों को जरूरत के अनुसार पानी दिया गया है।
क्या गुजरात को ज्यादा पानी दे रहे?
बिलकुल नहीं। जितनी आवश्यकता उन्हें है, उतनी ही मध्यप्रदेश को भी है।

बारिश कम होने से लेवल कम
इस साल कम बारिश होने से बांध पूरा नहीं भर सका। शासन की प्राथमिकता बिजली उत्पादन नहीं बल्कि पेयजल उपलब्धता की रहती है।
- अनुराग सेठ, इंदिरा सागर परियोजना प्रमुख