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स्वच्छता रैंकिंग कायम रखना चुनौती, चार माह में निगम लगा पाया सिर्फ 71 ग्रीन वेस्ट कंपोस्टिंग यूनिट

Bhaskar News | Last Modified - Nov 06, 2017, 05:33 AM IST

यूनिटों के लगने से शहर के कचरे का बेहतर प्रबंधन हाेगा, जिसके अंक स्वच्छता सर्वेक्षण में जुड़ने हैं।
  • स्वच्छता रैंकिंग कायम रखना चुनौती, चार माह में निगम लगा पाया सिर्फ 71 ग्रीन वेस्ट कंपोस्टिंग यूनिट
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    भोपाल.स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में पहला स्थान पाने के लिए जद्दोजहद कर रहा नगर निगम पिछले चार महीने में महज 71 ग्रीन वेस्ट कंपोस्टिंग यूनिट ही लगा पाया है। जबकि, इस काम में निगम ने 19 जोनों के एएचओ आैर उनकी टीम के साथ ही विशेषज्ञ भी लगा रखे हैं। एेसे में स्वच्छता में दूसरे नंबर की रैंकिंग कायम रख पाना मुश्किल है। इन यूनिटों के लगने से शहर के कचरे का बेहतर प्रबंधन हाेगा, जिसके अंक स्वच्छता सर्वेक्षण में जुड़ने हैं।
    - चार महीने पहले तत्कालीन निगम आयुक्त छवि भारद्वाज ने शहर के होटल, रेस्तरां, शादी हॉल, स्कूल, काॅलेज व रहवासी कॉलोनियों सहित ऐसे परिसर जो पांच हजार वर्ग फीट से ज्यादा बड़े हैं वहां ग्रीन वेस्ट कंपोस्टिंग यूनिट लगाने के आदेश दिए थे। निगम ने एक एनजीआे के माध्यम से ऐसी संस्थाओं और यूनिटों का सर्वे कराया था। तब करीब 200 यूनिट चिह्नित की गई थीं।
    अब 500 यूनिट लगाने का टारगेट
    - निगम आयुक्त प्रियंका दास ने शुक्रवार को स्वास्थ्य शाखा की समीक्षा बैठक के दौरान इसकी जानकारी ली थी। इस दौरान जोन 10, 13, 16 और 17 के एएचओ की ओर से एक भी यूनिट नहीं लगाए जाने की बात सामने आई।
    - आयुक्त ने इन्हें कारण बताओ नोटिस दिए हैं। इसके साथ ही इनके हफ्तेभर के टारगेट में भी इजाफा किया गया है। यही नहीं आयुक्त ने शहरभर में लगने वाली कंपोस्टिंग यूनिट का टारगेट बढ़ाकर 500 कर दिया है।
    कंपोस्टिंग यूनिट का दोहरा फायदा
    - ग्रीन वेस्ट कंपाेस्टिंग यूनिट लगाने का दोहरा फायदा है। पहला यह है कि घर या संस्थान से निकलने वाला कचरा यूनिट में डालने पर उसे बाहर फेंकने से लेकर कचरा खंती तक पहुंचाने में लगने वाले कर्मचारियों और संसाधनों की बचत हाेती है।
    - दूसरा फायदा यह है कि इससे बहुउपयोगी जैविक खाद प्राप्त हाेती है उसे बेचा भी जा सकता है। इसके लिए निगम ने नेशनल फर्टिलाइजर कंपनी से करार कर रखा है।
    अभी यहां लगी हैं
    - कैंसर अस्पताल
    - साधु वासवानी स्कूल
    - मैनिट
    - आकृति ईको सिटी कॉलोनी
    - वर्धमान कॉलाेनी, पटेल नगर
    - आईईएस कॉलेज
    - जमजम होटल
    - बिड़ला मंदिर
    - ताजुल मसाजिद
    कचरे की मात्रा के हिसाब से लगती है बड़ी-छोटी यूनिट
    - 50 रुपए से सात लाख तक की यूनिट लगाई जाती है। घरों में छोटी और संस्थानों से निकलने वाले कचरे की मात्रा के हिसाब से छोटी और बड़ी यूनिट लगाई जाती हैं। 5-10 किलाेग्राम ग्रीन वेस्ट के लिए दो पिट वाली यूनिट लगाई जाती है।
    - इसकी लागत करीब 40 हजार रुपए होती है, जिसमें 30-40 दिन में खाद बन जाती है। 20 किलोग्राम वेस्ट के लिए पांच ड्रम की यूनिट 27 हजारमें लगती है। इससे ज्यादा के लिए 10 ड्रम वाली यूनिट लगती है। इसकी लागत 45 हजार आती है।
    इम्तियाज अली, ग्रीन वेस्ट कंपोस्टिंग यूनिट विशेष
    दिसंबर तक लगानी ही होंगी
    - स्वच्छता सर्वेक्षण में ग्रीन वेस्ट प्लांट के लिए 1400 में से 50 अंक हैं। हमारा प्लांट नहीं बना है। हमारा प्रयास यह है कि हम ज्यादा से ज्यादा साइटों पर यूनिट लगाकर इन अंकों काे क्लेम कर सकें। अब दिसंबर तक 500 यूनिट लगानी हैं।
    एमपी सिंह, अपर आयुक्त, नगर निगम
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Web Title: Challenge To Maintain Cleanliness Ranking
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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