व्हीलचेयर पर हुआ कंटेम्प्रेरी डांस और भरतनाट्यम

6 वर्ष पहले
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भोपाल. भारत भवन में पहली बार दिव्यांगों पर केंद्रित समाराेह ‘समर्थ’ का शुक्रवार को दूसरा दिन भी रोमांचक रहा। यहां वीआरएन ग्रुप के कलाकारों ने शरीरिक अक्षमता के बावजूद ऐसी प्रस्तुति दी, जिसने देखने वालों को हैरत में डाल दिया।
 
कलाकारों ने व्हीलचेयर से कंटेम्प्रेरी डांस और भरतनाट्यम की प्रस्तुति के साथ ऐसे स्टंट किए, जो दर्शकों के लिए किसी अचंभे से कम नहीं थे। एक व्हीलचेयर पर कई कलाकारों का एक साथ खड़े होकर नृत्य करना वाकई कमाल था। यहां ब्राजील से आए कलाकार की प्रस्तुति भी खास रही। 
 
जोश और रफ्तार की यादगार प्रस्तुति 
कुरुक्षेत्र में कृष्ण-अर्जुन संवाद की प्रस्तुति के लिए दिव्यांग कलाकार कृष्ण बनकर बैसाखी और अर्जुन व्हीलचेयर के बने रथ पर आए। तीन मूक-बधिर लड़कियां इस प्रस्तुति में साथ रहीं। जोश और रफ्तार से भरी यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए यादगार बन गई। 
 
डांस में बड़ी झील और मंदिरों की यादें
ब्राजील की आर्टिस्ट इस्टिला लोपोनी को पैरालिसिस हुआ था, जिसका असर आज तक है। उन्होंने हिप-हॉप, सांबा और कंटेम्प्रेरी डांस में भोपाल की बड़ी झील, मंदिर आदि की यादों को पेश किया। उनका कहना है कि वह जहां प्रस्तुति देने जाती हैं, वहां की दर्शनीय चीजों को अपने डांस में शामिल करती हूं। दिव्यांग संगीतकार राजू राव ने भक्तिपदों की प्रस्तुति दी। उन्होंने तुलसीदास के पद ‘जाऊं कहां...’ और कबीर के पद ‘भजो रे मन राम...’ सुनाया। इसके बाद उन्होंने बिंदू के भजन ‘यदि नाथ दया निधि है तो दया भी करेंगे कभी न कभी...’ सुनाया।
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