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किसानों से लेकर कई स्तरों पर चर्चा के बाद ही स्कीम को लागू किया गया है : डॉ. राजौरा

मुख्यमंत्री ने खुद तीन बार किसानों के साथ चर्चा की।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 06:09 AM IST

  • किसानों से लेकर कई स्तरों पर चर्चा के बाद ही स्कीम को लागू किया गया है : डॉ. राजौरा
    भोपाल .भावांतर योजना को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि इसमें किसानों को निश्चित लाभ मिलेगा। किसानों से लेकर कई स्तरों पर चर्चा के बाद स्कीम को लागू किया गया है। दो बार कृषि कैबिनेट में, कैबिनेट में, सिएट में बुलाई गई बैठक में, मंडी अफसरों, कृषि अधिकारियों और इन सबसे पहले किसानों से ग्रुप में बात हुई। मुख्यमंत्री ने खुद तीन बार किसानों के साथ चर्चा की। इसलिए यह नहीं कह सकते कि किसानों से बिना बात किए ही योजना लागू कर दी गई है।
    - डॉ. राजौरा ने यह जवाब उस सवाल पर दिया, जिसमें उनसे पूछा गया था कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ही कह रहे हैं कि भावांतर योजना को लेकर कुछ लोगों में आक्रोश है। इसलिए इससे जुड़े किसान, व्यापारी और मंडी पदाधिकारियों के साथ सरकार को बात करनी चाहिए।
    - हालांकि मैं समझता हूं सीएम ने इसमें सुधार के निर्देश दिए होंगे। विजयवर्गीय ने यह बात 5 नवंबर को कही थी। डॉ. राजौरा से पूछा गया कि इतना सबकुछ योजना लागू करने से पहले किया गया तो भाजपा के नेता सवाल खड़े क्यों कर रहे हैं।
    - इस पर उन्होंने टिप्पणी करने से मना कर दिया। वे शुक्रवार को मंडी बोर्ड में मीडिया से बात कर रहे थे। मंडियों में किसानों के आक्रोशित होने के सवाल पर डॉ. राजौरा ने कहा कि मंडियों में वाद-विवाद तो होते रहते हैं, लेकिन यह भावांतर को लेकर नहीं है।
    - उन्होंने यह भी बताया कि 16 से 31 अक्टूबर तक का मॉडल रेट आ गया है। अगले मॉडल रेट अब फसल की खरीदी बंद होने के बाद आएंगे। पहले चरण में 248 करोड़ रुपए का भावांतर योजना में भुगतान होगा। आधी राशि केंद्र सरकार देगी।
    पूर्व सीएम गौर और सांसद मिश्रा भी उठा चुके हैं सवाल
    - एक सप्ताह पहले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने कहा था कि भावांतर योजना की कठिनाइयों और किसानों को समय पर पैसा न मिलने के कारण किसान आक्रोशित हैं। सरकार की छवि धूमिल हो रही है। योजना लागू होने से व्यापारियों ने एकजुट होकर फसलों के दाम घटा दिए हैं। हर फसल के बीच 1000-1200 तक का अंतर है। व्यापारी किसानों को आयकर विभाग का बहाना बनाकर 50 हजार रुपए नहीं दे रहा है। सरकार दो महीने बाद पैसे देगी। तीन राज्यों के आधार पर मध्यप्रदेश में मूल्य तय किया जाएगा।’
    - मुरैना सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता अनूप मिश्रा ने कहा था कि योजना मंत्रालय में बैठकर बनाई गई है। इसकी वजह से किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अफसर फील्ड में जाएं, मंडियों में किसानों से उनकी प्रतिक्रिया लें और योजना में सुधार करें।
    ऐसे मिलेगा भावांतर का पैसा
    - जिला-स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है।
    - कमेटी द्वारा पोर्टल पर दर्ज जानकारी का 7 दिन में वेरीफिकेशन कराया जाएगा।
    - पोर्टल पर दर्ज किसानों द्वारा पंजीकृत बैंक खाते का नंबर एवं आईएफएस (IFS) कोड दिया जाएगा।
    - मंडियों में फसल बेचने वाले 10 फीसदी किसानों की रेंडम जांच होगी।
    - किसानों के खाते में सीधे डिजिटल भुगतान किया जाएगा।
    - पुष्टि एवं सत्यापन के बाद 20 नवंबर तक सभी पंजीकृत एवं पात्र किसानों के बैंक खातों में भावांतर का पैसा डाल दिया जाएगा।
    - एसएमएस से जानकारी दी जाएगी।
    - जिन किसानों को 2,000 रुपए से अधिक राशि जारी की गई है, उनके प्रमाण-पत्र सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए जाएंगे।
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