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पोषण आहार वितरण का काम कंपनियों से लेकर अब स्वसहायता समूहों को देंगे

प्रदेश में पोषण आहार व्यवस्था में हो रहे भ्रष्टाचार को खत्म करने सरकार नया डॉक्युमेंट टेंडर लाने जा रही है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 06:17 AM IST

  • पोषण आहार वितरण का काम कंपनियों से लेकर अब स्वसहायता समूहों को देंगे
    भोपाल.प्रदेश में पोषण आहार व्यवस्था में हो रहे भ्रष्टाचार को खत्म करने सरकार नया डॉक्युमेंट टेंडर लाने जा रही है। इसे मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाना संभावित है। इस डॉक्युमेंट के हिसाब से पोषण आहार व्यवस्था से कंपनियों का एकाधिकार खत्म कर उसे स्वसहायता समूहों को सौंपा जाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही कैबिनेट में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
    - पोषण आहार की नई व्यवस्था में यह काम प्रोडक्शन यूनिट वाली कंपनियों के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों व महिला मंडलों को दिया जाएगा। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने टेंडर डॉक्युमेंट तैयार किया है।
    - प्रस्तावित नई नीति केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। जिसमें कहा गया है कि किसी एक एजेंसी के बजाय गांव-गांव में महिला स्वयं सहायता समूह और महिला मंडल पोषण आहार बनाकर सप्लाई करें। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2004 को निर्देश दिए थे कि ठेकेदारों को यह काम नहीं दिया जाए। ग्राम समितियों, स्वयं सहायता समूहों और महिला मंडलों से काम लें।
    एमएसएमई के लिए बनेगी नई पॉलिसी
    - बड़े उद्योगों को प्रोत्साहन के लिए तैयार की गई नीति के अनुसार ही राज्य सरकार कैबिनेट में मध्यम एवं सूक्ष्म लघु उद्योगों (एमएसएमई) के प्रोत्साहन के लिए तैयार की गई नीति को मंजूरी के लिए लाया जाएगा। इसमें छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित किए जाने की योजना रहेगी।
    राज्य की सभी आंगनबाड़ियों में ऐसे प्रभावी होगी व्यवस्था
    - प्रस्तावित नीति के मुताबिक राज्य की सभी आंगनबाड़ियों में पोषण आहार सप्लाई करने के लिए एक टेंडर नहीं होगा, बल्कि क्षेत्रवार निविदाएं बुलाई जाएंगी। इसके लिए यह भी शर्त होगी कि पोषण आहार तैयार करने के लिए प्लांट में हाईटेक ऑटोमेटिक मशीनें होनी चाहिए।
    - मध्यप्रदेश में स्वयं सहायता समूह पोषण आहार बनाने और वितरण का काम कर रहे हैं, ऐसे में टेक होम राशन का काम भी उन्हें ही सौंपा जा सकता है। इसमें किसी कंपनी की जरूरत नहीं। इसके साथ ही पोषण आहार में विकेंद्रीकरण इसलिए जरूरी है, क्योंकि स्व-सहायता समूहों के हाथ में काम होने से भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था की निगरानी ज्यादा बेहतर होगी।
    इन विषयों पर भी होंगे निर्णय
    { मुख्यमंत्री कन्या विवाह और निकाह योजना सहायता योजना स्वीकृत मदों को वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 में निरंतर रखने के संबंध में।
    { मध्यप्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2017-2018 से वर्ष 2019-20 के लिए निरंतरता की स्वीकृति।
    { अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन सद्भावना शिविरों का आयोजन एवं आदर्श ग्राम पंचायत पुरस्कार की निरंतरता 2019-20 में भी रखे जाने के संबंध में।
    { माध्यमिक शिक्षा मंडल, प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड की परीक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के निरंतरता के संबंध में।
    { मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1995 की धारा की धारा 13 में संशोधन के संबंध में।
    { राजकुमार मिल लिमिटेड इंदौर को राज्य शासन द्वारा दिए गए कर्ज पर ब्याज की माफी एवं विद्युत मंडल के बकाया देयकों के सरचार्ज की माफी के बारे में।
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