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बड़े बांधों में शुमार इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांध के बैक वाटर पर टापुओं की बस्ती

देश के बड़े बांधों में शुमार इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांध के बैक वाटर में मप्र पर्यटन विभाग ने टापुओं की बस्ती बना दी

वासुदेव चौहान | Last Modified - Nov 06, 2017, 05:47 AM IST

  • बड़े बांधों में शुमार इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांध के बैक वाटर पर टापुओं की बस्ती
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    खंडवा (भोपाल) .देश के बड़े बांधों में शुमार इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांध के बैक वाटर में मप्र पर्यटन विभाग ने टापुओं की बस्ती बना दी है। इनमें से इंदिरा सागर 913 वर्ग किलोमीटर व ओंकारेश्वर का बैक वाटर 94 वर्ग किलोमीटर में फैला है। पर्यटन विभाग हनुवंतिया व सैलानी के बाद बोरियामाल, धारी कोटला, नागरबेड़ा सहित अन्य टापुओं को भी तेजी से विकसित कर रहा है। इसका प्रमुख कारण पर्याप्त मात्रा में पानी व घना जंगल भी है। जंगली जानवरों की भी कमी नहीं है।
    ऐसे बन गए टापू
    - बिजली बनाने के लिए इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध बनाए गए। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक 30 जून 2004 को बांधों के कारण हरसूद गांव डूब गया था। करीब 250 गांव इसके डूब में आए थे। बैक वॉटर में ऊंचे क्षेत्र के टापू में अब तब्दील होते गए।
    हनुवंतिया में तीन साल में पहुंचे इतने पर्यटक
    वर्ष संख्या दिन
    2015- 16 45000 10 दिन जल महोत्सव
    2016-17 95000 30 दिन
    2017-18 16000 आज तक
    सैलानी टापू में पर्यटक
    24 मई 2017 से अब तक 35000
    मप्र में जलाशय बड़े हैं, इनमें वाटर ट्रीट की संभावना अधिक है
    - इस सबंध में मप्र के टूरिज्म रीजनल मैनेजर एसके गु्प्ता ने बताया कि मध्यप्रदेश में अनेक बड़े जलाशय है। इसलिए यहां वाटर ट्रीट की संभावना भी अधिक है। साथ ही प्रदेश में पानी, वन संपदा और वाइल्ड लाइफ भी है। इसलिए यहां के टापुओं को वन विभाग के सहयोग से तेजी से विकसित किया जा रहा है। ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटकों आकर्षित कर सकें।
    इंदिरा सागर: अभी सात पाइंट ही चिह्नित
    - रोडमैप के अनुसार इसमें करीब 32 टापू हैं। हालांकि यहां सिर्फ 7 पाइंट ही चिह्नित किए गए हैं। इनमें हनुवंतिया, फेफरिया खुर्द, बलडी़, इमलानी, नजरपुरा, लाछोरा माल और पाटा खाली सेगवा-पाटा खाली छोटा।
    ओंकारेश्वर जलाशय:
    - सैलानी टापू 24 मई 2017 को ही शुरू किया गया है। इसी तरह इसके सामने वाले टापू को भी संवारने की योजना है। वहीं धाराजी के पास भी एक टापू को चिह्नित कर काम शुरू किया जाएगा।
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