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कर्ज वरदान और अभिशाप दोनों हो सकते हैं : मलैया

वित्तमंत्री जयंत मलैया ने कहा है कि कर्ज लेना वरदान और अभिशाप दोनों हो सकते हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 06:12 AM IST

कर्ज वरदान और अभिशाप दोनों हो सकते हैं : मलैया
भोपाल.वित्तमंत्री जयंत मलैया ने कहा है कि कर्ज लेना वरदान और अभिशाप दोनों हो सकते हैं। हम कर्ज विकास कार्यों के लिए ले रहे हैं जो वरदान साबित हुआ है। वहीं, कांग्रेस के कार्यकाल में लिया कर्ज अभिशाप था। कर्ज लेने के सवाल पर मलैया ने ‘वाॅच लीगल 2017 कॉन्क्लेव में संपादकों के सवालों के साफगोई से जवाब दिए। मलैया के अलावा महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस व स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने अपने विभागों से संबंधित सवालों के जवाब दिए।
- कॉन्क्लेव में राज्य निर्वाचन आयुक्त आर. परशुराम, रिटा. डीजीपी एसके राउत, रिटा.डीजीपी (बीएसएफ) एनके त्रिपाठी, एसीएस एवं माशिमं अध्यक्ष एसआर मोहंती, राज्य आपदा प्रबंधन उपाध्यक्ष (पूर्व डीजीपी) सुरेंद्र सिंह, सिया के अध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव भी मौजूद थे।
- मलैया ने स्वीकार किया कि यह सही है कि प्रदेश पर पौने दो लाख करोड़ का कर्ज है। जरूरत पड़ी तो हम आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने आगे भी कर्ज लेंगे। उन्होंने कहा कि जब से प्रदेश में भाजपा सरकार है, तब से रेवेन्यू सरप्लस का बजट रहा है। राजकोषीय घाटे को एफआरबीएम एक्ट के अनुसार 3% तक सीमित रखा है।
- जिन राज्यों का वित्तीय प्रबंधन ठीक है, उन्हें आधा प्रतिशत की छूट है। इसका लाभ भी हमको मिलता है। हम अपनी जीएसडीपी का 25 प्रतिशत तक कर्ज ले सकते हैं, उससे कम ही हैं।
- तत्कालीन कांग्रेस की सरकार में यह 35 प्रतिशत तक था जो आदर्श होना चाहिए उससे 10 प्रतिशत अधिक था। उस दौरान अपनी आय का 20 से 21 प्रतिशत ब्याज दिया जाता था, आज 8 प्रतिशत ही है।
गांवों का विकास होगा तभी होगी तरक्की
- मलैया ने कहा कि प्रदेश में तरक्की के कई काम हुए हैं। कृषि उत्पादन बढ़ा, सिंचाई का रकबा बढ़ा है। बिजली का उत्पादन 18 हजार मैगावाट हो गया है। अब लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजना चल रही है।
- मलैया ने कहा कि अभी गांवों के विकास की आवश्यकता है, तभी सही मायने में विकास होगा। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि जब तक हम जनसंख्या को नियंत्रित नहीं करते तब तक सफलता का स्वाद नहीं मिलेगा।

स्थानीय मुद्दों पर दें ध्यान - परशुराम
राज्य निर्वाचन आयुक्त आर. परशुराम ने कहा कि हमे स्थानीय मुद्दों तथा उस स्तर तक की इकाइयों को मजबूत करना होगा। तभी हम विकास को सही अर्थों में स्वीकार कर पाएंगे। माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष एसआर मोहंती ने कहा कि विकास का रोडमेप तैयार करने से ही विकास हो सकेगा। साथ ही सफलता की गारंटी भी रहेगी।
परंपराओं से जुड़कर परिवर्तन की होगी शुरुआत : अर्चना
महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस ने उनके विभाग द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमे अमेरिका और चीन जैसा विकास नहीं करना, हमे अपनी परंपराओं से जुड़ा विकास चाहिए। यही कारण था कि पहले हमारी परंपराओं में एनीमिया जैसी बीमारी का समाधान था।
प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी : रुस्तम सिंह
स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने स्वीकार किया कि प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, जिसके लिए इंटरव्यू से भर्ती की जा रही है। उन्होंने कहा कि 2003 में प्रदेश के भीतर अस्पतालों में एसएनसीयू जैसी इकाई नहीं होती थी। अब नवजात मृत्यु रोकने के लिए 54 एसएनसीयू कार्य कर रहे हैं। मप्र में संस्थागत प्रसव की दर में सुधार आया है।
चर्चा में इन्होंने भाग लिया
कॉन्कलेव के शुरुआत में रिटायर्ड डीजी (बीएसएफ) एनके त्रिपाठी ने कॉन्कलेव के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। आभार वॉच लीग की कन्वीनर चंदना अरोरा ने व्यक्त किया। चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह, गिरजाशंकर, अवनीश जैन, विजय मनोहर तिवारी, शरद द्विवेदी, ‌विभांशु जोशी और ब्रजेश राजपूत ने भाग लिया।
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