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पीसीबी में जल व वायु मॉनिटरिंग के नहीं हैं पर्याप्त उपकरण, तैयार कर रहे फर्जी रिपोर्ट

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल जल और वायु मॉनिटरिंग की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 05:45 AM IST

  • पीसीबी में जल व वायु मॉनिटरिंग के नहीं हैं पर्याप्त उपकरण, तैयार कर रहे फर्जी रिपोर्ट
    भोपाल.मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल जल और वायु मॉनिटरिंग की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। बोर्ड जल व वायु का विश्लेषण कर जो रिपोर्ट जारी कर रहा है वो आंकड़ों में छेड़छाड़ से भरी होती है। इसका कारण बोर्ड के पास जल, वायु, ध्वनि और भूमि के मापन के लिए पर्याप्त संख्या में नवीनतम उपकरण नहीं होना है। आलम यह है कि बोर्ड अब तक संवेदनशील क्षेत्रों की रियल टाइम मॉनिटरिंग तक शुरू नहीं कर सका है। बोर्ड पर यह आरोप पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताअों ने लगाए हैं। राजधानी सहित प्रदेश के पर्यावरणविदों ने सोमवार को पीसीबी का घेराव किया।
    - इस दौरान पीसीबी के चेयरमैन मलय श्रीवास्तव और मेंबर सेक्रेटरी एएन मिश्रा से चर्चा कर ज्ञापन सौंपा। पर्यावरणविदों का आरोप है कि बोर्ड में कई कर्मचारी भ्रष्ट हैं और एनजीटी व हाईकोर्ट के आदेशों की केवल खानापूर्ति की जा रही है।
    - सेमिनार आयोजित तो किए गए हैं लेकिन उनमें रिसर्च पेपर पढ़ने जैसी कोई गतिविधि शामिल नहीं की गई। मप्र पर्यावरण अधिकार मंच के तहत रैली निकालकर पहुंचे पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन उनकी मांगों पर एक माह के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता है तो मजबूरन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।
    बेंजीन, बेंजो पायरिन, आरसेनिक जैसी गैसों की जांच ही शुरू नहीं
    - पीसीबी अभी भोपाल सहित 14 शहरों में पार्टिकुलेट मैटर 10, पार्टिकुलेट मैटर 2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाय ऑक्साइड, ओजोन, लैड और अमोनिया की ही मॉनीटरिंग कर रहा है।
    - इनमें भी ओजोन और लैड की मॉनीटरिंग चुनिंदा स्टेशनों पर ही हो रही है। वहीं कार्बन मोनो ऑक्साइड, बेंजीन, बेंजो पायरिन, आरसेनिक व निकल जैसी गैसों की तो अभी जांच ही शुरू नहीं हुई है। प्लास्टिक के जलने से निकलने वाली डायऑक्साइन और पॉलिसाइक्लिक ऑर्गेनिक मैटर को जांचने के भी उपकरण नहीं है।
    दो साल से अध्यक्ष व तीन साल से मेंबर सेक्रेटरी का पद खाली
    - चर्चा के दौरान नगरीय विकास, आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव व पीसीबी के अध्यक्ष मलय श्रीवास्तव ने जब शिकायतों और आरोपों पर सबूत मांगा तो डॉ. सुभाष पांडे ने कहा कि पहले भी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
    - डॉ. पांडे का कहना है कि पिछले दो साल से पीसीबी का अध्यक्ष पद तीन साल से मेंबर सेक्रेटरी का पद खाली है। मेंबर सेक्रेटरी के पद पर जिन्हें नियुक्त किया गया था उनका कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है।
    - बैठक में अध्यक्ष और मेंबर सेक्रेटरी के पद पर नियमानुसार नियमित अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की गई। डॉ. पांडे ने कहा कि पीसीबी जो रिपोर्ट बनाता है वो पूरी तरह से फर्जी होती है और टेबल पर बैठकर बनाई हुई होती है। सीवेज फार्मिंग पर पांच रिपोर्ट को गलत साबित किया जा चुका है। इसकी जानकारी पीसीबी के मेंबर सेक्रेटरी को भी है।
    आरोपों से जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद ही संबंधित पर की जाएगी कार्रवाई
    - शासन को पीसीबी के अध्यक्ष पद के लिए पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है। एक बार फिर से रिमाइंडर भेजा जाएगा। पर्यावरणविदों के जो भी आरोप हैं उनसे जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद संबंधित के खिलाफ कार्रवाई जांच की जाएगी। रही बात उपकरणों की तो उन्हें खरीदने और रियल टाइम मॉनीटरिंग की व्यवस्था जल्द ही की जाएगी।
    मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, पर्यावरण विभाग
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