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कंपोजिशन स्कीम की लिमिट एक से बढ़ाकर 1.5 करोड़ करने की तैयारी

मोदी सरकार छोटे और मझोले कारोबारियों को राहत देने के लिए जीएसटी के कुछ नियमों में बड़े बदलाव कर सकती है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 07, 2017, 04:07 AM IST

  • कंपोजिशन स्कीम की लिमिट एक से बढ़ाकर 1.5 करोड़ करने की तैयारी
    भोपाल.मोदी सरकार छोटे और मझोले कारोबारियों को राहत देने के लिए जीएसटी के कुछ नियमों में बड़े बदलाव कर सकती है। जीएसटी काउंसिल अपनी अगली बैठक में कंपोजिशन स्कीम को ज्यादा आकर्षक बनाने की तैयारी में है। पिछली बैठक में इस योजना की सीमा को 75 लाख से बढाकर एक करोड़ किया गया था। अब इसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपए करने पर गुवहाटी की बैठक में मुहर लग सकती है।इसमें अंतरराज्यीय आपूर्ति को भी शामिल किया जा सकता है। यही नहीं, कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा दी जा सकती है। हालांकि इस बदलाव को लागू करने में कुछ समय लग सकता है, क्योंकि इसके लिए जीएसटी अधिनियम में संशोधन करना होगा।
    - इस बदलाव से जुड़े एक व्यक्ति के अनुसार यह मुद्दा असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा की अगुआई वाली मंत्रियों की समिति की बैठक में भी चर्चा में रहा।
    - वहां पर आम राय थी कि छोटे और मझोले उद्यमों के लिए जीएसटी के तहत अनुपालन का बोझ कम करने की जरूरत है।
    - यह कंपोजिशन योजना का दायरा बढ़ाने से हो सकता है।
    - यही नहीं इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा भी कंपोजिशन योजना के तहत दी जा सकती है, जिससे कि छोटे व्यापारियों के लिए इसका विकल्प अपनाना आसान हो।
    - वर्तमान में कई छोटे कारोबारी कंपोजिशन योजना अपनाने से हिचक रहे हैं। इन प्रस्तावित बदलावों का असर देश के लाखों छोटे कारोबारियों और उद्यमियों पर पड़ेगा।
    अभी ये कमियां...
    - रजिस्टर्ड कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकता। इनवॉयस भी जारी नहीं कर सकते। इसमें पंजीकृत डीलर से आप सामान खरीदते हैं तो इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकते।
    - कंपोजिशन डीलर को 3 माह में जीएसटीआर-4 रिटर्न और हर साल जीएसटीआर-9ए भरना होता है, जबकि सामान्य करदाता को हर महीने तीन फॉर्म दाखिल करने होते हैं।
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