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हाईकोर्ट ने एनजीटी के आदेशों के साथ पूरी प्रोसीडिंग को ही रद्द किया

भोपाल बेंच द्वारा न्यायिक क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर निर्णय दिए जाने पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 05:10 AM IST

  • हाईकोर्ट ने एनजीटी के आदेशों के साथ पूरी प्रोसीडिंग को ही रद्द किया
    भोपाल.नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की भोपाल बेंच द्वारा न्यायिक क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर निर्णय दिए जाने पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। जबलपुर हाईकोर्ट ने दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कुंडलपुर ट्रस्ट की याचिका पर न सिर्फ एनजीटी के मंदिर निर्माण पर रोक लगाने के आदेश को खारिज कर दिया, बल्कि पूरी प्रोसीडिंग को ही न्यायिक क्षेत्राधिकार के बाहर होने के कारण निरस्त कर दिया। यह पहली बार नहीं है जब एनजीटी के निर्णय के क्षेत्राधिकार पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाएं हैं। इससे पहले कलियासोत नदी किनारे 33 मीटर दूरी तक बने मकानों को तोड़ने, इंदौर में जिला न्यायालय भवन निर्माण से जुड़ी याचिका पर संज्ञान लेने के मामले में भी एनजीटी के आदेशों के पालन पर रोक लगाई जा चुकी है। वहीं राजधानी में ऑटो मोबाइल सर्विस सेंटर्स पर 11-11 लाख रुपए जुर्माने के आदेश के पालन पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका है।
    कुंडलपुर मंदिर विवाद में हाईकोर्ट की टिप्पणी
    - याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है। बिना न्यायिक क्षेत्राधिकार के एनजीटी द्वारा इस याचिका में प्रोसीडिंग की गई है, इसलिए इसे निरस्त किया जाता है। याचिका दायर करने वाली संस्था भोपाल स्टडी सर्किल और इंटरवीनर जैन रक्षा मंच पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाता है।
    न्यायिक क्षेत्राधिकार के कारण सालों से अनसुलझे हैं विवाद
    ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर विवाद
    आदेश: एनजीटी ने भोपाल के ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर्स पर प्रदूषण की भरपाई के लिए 11-11 लाख रुपए जुर्माना, पौधे लगाने, कंटेनर रखने और ऑटोमोबाइल वर्कशॉप संचालकों को ग्रीन जनसुविधा टॉयलेट बनवाने के निर्देश दिए थे।
    आदेश : एनजीटी ने कलियासोत नदी के किनारे 33 मीटर तक ग्रीन बेल्ट का निर्माण करते हुए इस दायरे में राजधानी के बिल्डर्स द्वारा बनाए गए सभी मकानों और टाउनशिप को जमींदोज करने के आदेश दिए थे।
    आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
    एक समान रूप से बिना किसी फॉर्मूले के जुर्माना लगाने के खिलाफ ऑटो मोबाइल संचालक सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले ढाई साल से इस आदेश के पालन पर रोक लगा रखी है।
    नजीता : इस कारण ऑटोमोबाइल संचालकों द्वारा बनावए गए 20 ग्रीन टॉयलेट पर भी ताला पड़ा हुआ है। -याचिकाकर्ता : जगमोहन पाटीदार
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